September 19, 2021

हल्द्वानी लाइव

आपकी आवाज़

कांग्रेस ने चल दी चाल, नैनीताल से पुराने और गढ़वाल से नये खिलाड़ी पर खेला दांव !

देश में लोक सभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। सियासी शतरंज की बिसात बिछ चुकी है। राजनैतिक दल अपने-अपने मोहरे शतरंज की बिसात पर सजा चुके हैं। कांग्रेस पार्टी ने भी बीजेपी प्रत्याशियों के मोहरों को आंकने के बाद चुनावी शतरंज की बिसात पर चाल चल दी है। यानि कांग्रेस ने लोकसभा उम्मीदवारों की एक और लिस्ट जारी की है। लिस्ट में 38 मोहरों यानि उम्मीदवारों के नाम चस्पा है। जिनमें उत्तराखंड की 5 , उत्तर-प्रदेश की तीन, कर्नाटक की 18, महाराष्ट्र की 1, मध्य प्रदेश की 9 और मणिपुर की दो सीटें शामिल हैं।

उत्तराखंड में 5 लोकसभा सीटों पर कांगेस ने बीजेपी की चाल के बाद अपने मोहरों को मैदान में उतार दिया है। सबसे पहले पायदान पर कुमांऊ की अहम सीट है नैनीताल-ऊधमसिंह नगर, इस सीट पर कांग्रेस ने अपने पुराने सिपाहसालार यानि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर भरोसा जताया है। जबकि वो किच्छा और हरिद्वार दोनों ही सीटों से विधानसभा का तुनाव तक हार गये थे। बावजूद इसके पार्टी ने उनके कद को कद्दावर बनाने का निर्णय लिया। इसके बाद गढ़वाल की अहम सीट आती है, यहां पर पार्टी ने एक नये उम्मीदवार पर अपना दांव खेल दिया है, या यूं कहें कि एक ऐसी शतरंजी चाल चली है जो बीजेपी को बेहद भारी पढ़ सकती है।

इस सीट पर कांग्रेस की ओर से मनीष खंडूड़ी को अपना मोहरा बनाया गया है। जो बीजेपी उम्मीदवार के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। क्योंकि इनके पिता राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी हैं और जो वर्तमान में टिकट न मिलने से काफी आहत भी हैं। ऐसे में बीजेपी के उम्तोमीदवार के लिए राह आसान तो नहीं ही होगी। वहीं टिहरी गढ़वाल से प्रीतम सिंह, अल्मोड़ा ( आरक्षित ) प्रदीप टमटा, हरिद्वार से अंबरीश कुमार को चुनाव के सियासी दंगल में उतारा गया है।

चलिए अब इन 5 लोकससभा सीटों पर कुछ गुफ्त-गूं कर लेते हैं। उत्तराखंड लोकसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ पार्टी यानि बीजेपी और विपक्षी दल कांग्रेस के बीच है। इसमें भी दो सीटें बेहद अहम हैं। पहली कुमाऊं की नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा सीट। इस सीट पर मुकाबला बेहद रोमांचक होगा। दरअसल नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा सीट से वर्तमान में सांसद हैं, बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके भगत सिंह कोशयारी।

लेकिन पार्टी ने इनसे किनारा करते हुए इनकी जगह मैदान में उतारा है भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को। बीता विधान सभा चुनाव हार चुके भट्ट पर पार्टी ने बड़ा दांव खेला है। भट्ट का ये पहला लोकसभा चुनाव होगा।

सूत्रों की माने तो संगठन में अच्छी पैठ के चलते भट्ट को ये सीट ईनाम के तौर पर मिली है वर्तमान सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी पर भरोसा न जताकर। वो भी ऐसे में जबकि वो पिछला विधान सभा चुनाव तक हार चुके हैं। बहरहाल हार और जीत तो इस चुनावी खेल का हिस्सा है।

असली लड़ाई तो भट्ट को उस खेमें के समर्थकों से लड़नी है जिनका टिकट कटवाकर वो मैदान में जा उतरे हैं। हालांकि भट्ट पर संगठन में काम करने का लंबा अनुभव है। वहीं दूसरी ओर चुनावी शतरंज में बीजेपी के मोहरा चलते ही कांग्रेस ने अपने बेहतरीन प्यादे यानी पुराने सिपाही हरीश रावत को मैदान में एक कदम आगे चल दिया है।

भट्ट की तरह ही हरीश रावत भी इस सीट पर पहली बार लोकसभा के लिए मैदान में उतरे हैं। रावत की परंपरागत सीट अल्मोड़ा थी, जोकि आरक्षित हो चुकी है, इस सीट के आरक्षित हो जाने के बाद हरीश 2009 में हरिद्वार से से मैदान में उतरे। जबकि 2014 में इस सीट से उनकी पत्नी रेणुका रावत और 2017 के विधानसभा चुनाव में हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा दोनों जगह से एक साथ हारने के बाद हरिद्वार उन्के लिए महफूज़ सीट नहीं थी। इसलिए पार्टी ने बेहद सूझ-बूझ के साथ उन्हें नैनीताल से टिकट दिया है। हरीश रावत की ये तीसरी लोकसभा सीट होगी जहां से वो लोकसभा पहुंचने के लिए जंग में उतरे हैं। सही मायने में जिस सीट से हरीश रावत को मैदान उतारा गया है वो असल में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे स्व. नारायण दत्त तिवारी का संसदीय क्षेत्र भी रहा है।

तिवारी के बाद यहां पर कांग्रेस का कोई कद्दावर नेता मैदान में नहीं उतरा। ऐसे में पार्टी ने हरीश रावत पर  नैनीताल सीट से अपनी सियासी चाल चली है। लेकिन इस चाल के बीच में जिस तरह से बाजपा के उम्मीदवार अजय भट्ट को कोश्यारी समर्थकों से दो-दो हाथ करने हैं, उसी तरह हरीश रावत को भी मैडम से मुकावले की चुनौती होगी।

मैडम बोले तो इंदिरा ह्रदयेश। बीते नगर निगम चुनाव में मैडम के बेटे सुमित ह्रदयेश को मिली हार के बाद से मैडम और रावत में मन-मुटाव जग-जाहिर रहा है। लेकिन पिछले 2 सालों में जिस तरह से हरीश रावत ने पिछली ग़ल्तियों से सीखते हुए ज़मीन से जुड़कर काम किये वो उनको फायदा ज़रूर पहुंचा सकते हैं। तो वहीं भट्ट को संगठन का तर्जुवा और मोदी फैक्टर का लाभ भी मिल सकता है।                                      

Share, Likes & Subscribe