September 17, 2021

हल्द्वानी लाइव

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आखिर क्यों मान रहा है पूरा विश्व आईएमए का लोहा ?

उत्तराखंड- भारतीय सैन्य अकादमी अपने कड़े प्रशिक्षण और अनुशासन के लिए पूरे दुनिया में मशहूर है। यहां न केवल भारतीय प्रशिक्षण लेते हैं बल्कि कई विदेशी भी यहां प्रशिक्षण में शामिल होते हैं। भारतीय सैन्य अकादमी का कई साल पुराना गौरवशाली इतिहास रहा है। इसकी शुरुआत 40 कैडेट के साथ 1932 में हुई थी। जिसके बाद भारतीय सैन्य अकादमी ने देश को कई जांबाज दिये।

बीते दिनों आर्मी कैडेट कॉलेज के दीक्षांत समारोह के साथ आईएमए कई देशों के कैडेटों की पीपिंग सेरेमनी करवाई। पहली बार ऐसा हुआ है कि पासिंग आउट परेड से पहले विदेशी कैडेटों की पीपिंग सेरेमनी कर दी गई है, कमांडेट हरिंदर सिंह सभी को बधाई देते हुए कैडेटों की वर्दियों में सितारे सजाए। बताया जा रहा है, कि पास आउट हो चुके ये कैडेट अब अन्य देशों के संस्थानों में एडवांस कोर्स करेंगे।

IMA पास आउट परेड

पास आउट होने वाले कैडेटों में कुल 70 विदेशी कैडेट शामिल हैं जिनमें अफगानिस्तान के 41, भूटान के 17, नेपाल के 02, तजाकिस्तान और वियतनाम के 03 कैडेट हैं। इसके अलावा श्रीलंका के 01, मरीशस के 01, मालदीव के 01 और म्यांमार के भी 01 कैडेट शामिल हैं। अब तक कुल 200 विदेशी कैडेट यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

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