मुख्यमंत्री जी शर्म कर लो और मासूमों को उनका हक़ दे दो…वरना चुल्लू भर पानी तो है ही..!

 

फाइल फोटो - ठंड में खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर मासूम
फाइल फोटो – ठंड में खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर मासूम

भीमताल #BolUttarakhandBol  अपने राज्य में विकास के हालात बद् से बद्तर होते जा रहे हैं…न नौकरी, न रोजगार , न मूलभूत सुविधाएं और न ही मासूमों को पढ़ने के लिए एक अदद स्कूल की छत…

#UttarakhandPooreducationsystem

सुनने में वाकई बेहद अटपटा सा लगता है…लेकिन सच्चाई तो यही है…एक ऐसी सच्चाई जिससे आप और हम मुंह नहीं मोड़ सकते…चाहें कांग्रेस सरकार रही हो या फिर वर्तमान में बीजोपी की सरकार…इन सरकारों के किये काम राज्य में कहीं दिखाई नहीं पढ़ते…हैरानी तो इस बात की है अपने छोटे से 13 ज़िलों वाले राज्य में आज भी हमारे मासूमों को पढ़ने के लिए एक अदद स्कूल की छत तक मुहैय्या नहीं हो सकी है…

सरकार की बातें ऐसी कि ज़रा सी बुराई करने पर लोग मरने मारने और गाली-गलौच करने तक पर उतारू हो जाते हैं…लेकिन ह़कीक़त को समझना कोई नहीं चाहता…अपने उत्तराखंड में शिक्षा के जो हालात नज़र  रहे हैं…वो मोदी के डिजिटल इंडिया के सपनों को पूरा करते नहीं दिख रहे… चलिए हम सिर्फ अपने ज़िले यानि नैनीताल की ही प्रारंभिक शिक्षा की स्थिति की बात करते हैं….आपको ये जानकर बेहद हैरानी होगी…कि वन खलों में संचालित नैनीताल ज़िले के 59 स्कूल ऐसे हैं…जिनकी हालत र हालात बद् से बद्तर हैं…इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के सिर पर स्थाई छत तक नहीं…और सबसे बड़ी बात ये कि इन 59 विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 5000 मासूम अस्थाई भवानों में प्रारंभिक शिक्षा लेने को मजबूर हैं…

नैनीताल ज़िले के इन 59 स्कूलों की हालत ऐसी है कि ये स्कूल मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित हैं…इन स्कूलों में बिजली की व्यवस्था तो दूर की बात है…इनमें तो बच्चों को पीने वाले पानी की तक कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है… आप और हम हमज़ अंदाज़ाभर लगा सकते हैं…कि कैसे पहाड़ी इलाके के करीब 5000 बच्चे प्रारंभिक शिक्षा पा रहे होंगे…

सरकारी झमेलों में उलझे Nainital District के 59 स्कूलों पर सरकार पूरी तरह आंखें मूंदे बैठी दिखी दे रही है…जानकारी के मुताबिक सन् 2008-2009 में इन स्कूलों के भवन निर्माण के लिए 14 लाख 47 हज़ार रुपए उस वक्त की मौजूदा सरकार ने जारी किये थे…लेकिन सर्वशिक्षा भियान के तहत इन स्कूलों में भवनों का निर्माण हो पाता…उससे पहले ही जिस ज़मीन पर पर स्कूलों के भवनों का निर्माण होना था…उसमें सरकारी पेंच आ लगा…दरअसल जहां स्कूलों के भवन का निर्माण होना था उस ज़मीन पर वन विभाग ने दावा ठोंक दिया…और वन विभाग ने स्कूल भवन निर्माण की अनुमति नहीं दी…

बावजूद इसके बच्चों को हो रही परेशानी पर किसी का भी ध्यान नहीं गया…करीब 9 साल…वन विभाग से अनुमति मिलने में ही निकल गये…कसम से बड़ा ही ग़जब का है हमारा सरकारी तंत्र…लेकिन इन 9 सालों तक वो पैसा यानि 14 लाख 47 हज़ार रुपया शिक्षा विभाग के पास ही रखा रहा जो स्कूल भवनों के निर्माण के लिए सरकार की ओर से जारी किया गया था…लेकिन जब 9 साल बीत जाने के बाद भी जब वन विभाग ने स्कूल भवन निर्माण की अनुमति नहीं दी तो साल 2016-2017 में 14 लाख 47 हज़ार की रकम वापस शासन के खाते में जमा हो गई…औरकरीब 5000 मासूमों को वो हक़ नहीं मिल सका जिसके वो हक़दार थे…जिस वन भूमि पर स्कूल के भवनों का निर्माण होना था…उनके हस्तांतरण के लिए सरकार को 23 प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं…लेकिन अब तक समस्या का कोई हल नहीं निकल सका है…वजह सरकार का ढीलेपन से कार्यकलाप…

लेकिन उससे भी हैरानी और हास्यापद बात ये है, कि इन 59 स्कूलों में से रामनगर के पटरानी और शिवनाथपुर के प्रारंभिक शिक्षा स्कूलों को जूनियर से बढ़ा कर जूनियर हाईस्कूल का दर्ज़ा तक दे दिया गया…वो भी तब जब इन जूनियर यानि प्ररंभिक विद्यालयों में बच्चों के सर के नीचे एक अदद छत तक मुहैय्या नहीं थी…  

हल्द्वानी के इंदिरानगर में प्रारंभिक विद्य्ालय भवन निर्माण के लिए भीख़ मांगते अभिभावक
हल्द्वानी के इंदिरानगर में प्रारंभिक विद्यालय भवन निर्माण के लिए भीख़ मांगते अभिभावक

अभी कुछ दिनों पहले ही हल्द्वानी के इंदिरानगर इलाके में भी प्रारंभिक विद्यालय के भवन निर्माण को लेकर वहां पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने सरकार की उदासीनता के चलते…भवन निर्माण के लिए सड़कों पर निकलकर हाथ में कटोरा लेकर भीख़ तक मांगी…बावजूद इसके सरकार पर जूं तक नहीं रेंगी…

वाकई गजब सिपाहसलार हैं मोदी के …क्योंकि जहां पीएम मोदी देश भर के शिक्षा तंत्र को डिजटल शिक्षा प्लेटफार्म में तब्दील कर देना चाहते हैं…वहीं उनकी पार्टी की सरकार के मुखिया उनके सपनों को पूरा करना तो दूर…उस पर ध्यान देना तक नहीं चांहते, बल्कि राज्य में डिजिटल क्लासेज़ की बड़ी बड़ी बातें कर… गुड़गांव की Smart Class नाम की एक बड़ी डिजिटल एजुकेशन कंपनी से डील कर, मोटा कमीशन लेकर इन मासूमों का हक़ मार कर…अपनी जेब गर्म करने पर तुले हैं…अब आप ही फैसला करें, कि ऐसे कमीशनखोरों के चलते क्या वाकई राज्य में शिक्षा की व्यवस्था सुधर पायेगी…?

लानत है ऐसी सरकार और सिस्टम पर जो अपने राज्य के मासूमों को प्रारंभिक शिक्षा तक ठीक से मुहैय्या नहीं करवा पा रही…लानत है ऐसी सरकार और सिस्टम पर जो देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है…लानत है राज्य के मुखिया पर जो मासूमों को उनका हक़ तक नहीं दे पा रहा…और लानत है राज्य के सिपाहसालार पर जो देश के प्रधानमंत्री की छवि को मिट्टी में मिले पर आमादा है…शर्म कर  लो और मासूमों को उनका हक़ दो या फिर चल्लू भर पानी तो है ही…              

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One thought on “मुख्यमंत्री जी शर्म कर लो और मासूमों को उनका हक़ दे दो…वरना चुल्लू भर पानी तो है ही..!

  • January 24, 2018 at 8:23 am
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    शिक्षा व्यवस्था का हाल बहुत बुरा है ।
    अच्छी स्टोरी , स्वस्थ पत्रकारिता और वाजिब सवाल ।
    शानदार
    बधाई ।
    👍👍

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