जीत के लिए न आंखे और कान नहीं चाहिए आवाज़ बुलंद करने का जज़्बा चाहिए

उत्तराखंड , देहरादून, हल्द्वानी लाइव कहते हैं कि ईश्वर जिससे कुछ लेता है उससे भी कहीं अधिक उसको देता भी है। ये केवल चंद लाइनें नहीं हैं, बल्कि इंसानी हकीकत है। एक ऐसी हक़ीक़त जिसने न सिर्फ उत्तराखंड का नाम दुनिया में ऊंचा किया बल्कि अपनी बुद्धिमानी का भी परचम लहराया।

ये हकीकत है हमारे उत्तराखंड के देहरादून की रहने वालीं आस्था पटवाल की। वही आस्था जिनकी आस्था न सिर्फ खुद पर अटूट है बल्कि ईश्वर पर भी उतना ही अटूट। आस्था की उम्र तो महज़ 16 साल साल है, लेकिन ईश्वर ने उन्हें देखने और सुनने की शक्ति नहीं दी। लेकिन दुनिया में कुछ अलग करने का वरदान जरूर दिया।

जहां चाह वहां राह !

आस्था ने हाल ही में एक प्रतियोगिता में पूरी दनिया में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। ये प्रतियोगिता यूएन यानि संयुक्त राष्ट्र ने आयोजित की थी। आस्था ने इस प्रतियोगिता में बता दिया कि अगर खुद में इंसान की अटूट आस्था हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।

यूएन की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता का नाम था यूएन वर्ल्ड डेटा फोरम कंप्टीशन । इसका विषय था डेटा यानि आंकड़े क्यों ज़रूरी है। इस प्रतियोगिता में दुनियाभर के 15 साल से लेकर 24 साल तक के युवाओं ने हिस्सा लिया था । इस प्रतियोगिता में पहले स्थान पर पुर्तगाल के युवाओं ने वाजी मारी लेकिन आस्था ने इसमें दूसरा स्थान झटक लिया ।


आस्था ने इस प्रतियोगिता में एक वीडियो के ज़रिए हिस्सा लिया था। और बताया कि दो दिव्यांगताओं से ग्रस्त ( देख व सुन नहीं सकतीं ) लोगों को भी आम जनता का हिस्सा मानना क्यों और कितना ज़रूरी है । साइन लैंग्वेज यानि इशारों के ज़रिए आस्थआ ने इस वीडियो में बताया कि मैं आप लोगों के लिए अदृश्य हूं । ये वीडियो संदेश तकरीबन एक मिनट संबा है । जिसमें आस्थआ ने कहा है कि हमें जनगणना में शुमार नहीं किया जाता। किसी को भी नहीं पता है कि दुनिया में हमारे जैसे कितने लोग हैं । आस्था ने कहा कि हमें जनगणना में शामिल कीजिए और दूसरों को प्रेरित करने का मौका दीजिए।


आस्था इतने पर ही नहीं रुकीं , आस्थआ ने संदेश में कहा है कि आजकल कोरोना महामारी हम सबके लिए एक बड़ी बाधा के तौर पर खड़ी है। हम जैसे लोगों के लिए डेटा अथवा आंकड़े , हमारे भविष्य की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाते है। हम छोटी सी चिंगारी ज़रूर हैं , लेकिन पूरे देश को रौशन करने की क्षमता रखते हैं। हम पर भरोसा करके तो देखिए – एक बेहतर दुनिया के लिए हमें अपने साथ जोड़िए तो सही ।


आस्था का ये वीडियो अहमदाबाद की सेंस इंडिया नाम एक एनजीओ ने बनाया है । इस एनजीओ ने न सिर्फ आस्थआ का हौसला बढ़ाया बल्कि उन्हें ये पूरी तरह से सपोर्ट भी कर रही है। आस्था का कहना है कि हम दुनिया को बताना चाहते हैं कि हम भी दुनिया का एक अहम हिस्सा हैं । बहरहाल होनहार आस्था एक अध्यापक यानि टीचर यानि शिक्षिका बनकर अपने जैसे ही लोगों की मदद करना चाहती हैं ।

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