नये साल पर मिल सकती है राज्य को नये मुख्यमंत्री की सौगात…सूत्र

   ये क्या हुआ … कैसे हआ …कब हुआ…!!!…CM Trivendra Singh Rawat

उत्तराखंड #HaldwaniLive #BolHaldwaniBol अपने राज्य के राजनैतिक हालात डामाडोल होने की ख़बर मिली है…जब से राज्य में भाजपा की नई सरकार आई, तभी से सरकार दो धड़ों में चल रही है। ये किसी से छिपा नहीं है। हल्द्वानी-लाइव ने जून के महीने में ही  फेसबुक पर इस घटनाक्रम के होने  की आशंका जताई थी, कि साल खत्म होते-होते या फिर नये साल की शुरूवात में राज्य को नया सिपाहसालार मिल सकता है। यकीन न हो तो इस  इस लिंक को ज़रूर क्लिक करें – https://www.facebook.com/HaldwaniLive/ 

पुख्ता सूत्रों के हवाले से ख़बर मिल  रही है, कि राज्य में बड़ा बदलाव हो सकता है…कुछ दिनों से अपने राज्य की  राजनीति में भाजपा के एक धड़े में जो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का धुर-विरोधी खेमा है, अपने आप को मजबूत साबित करने में जुटा था।

पुख्ता सूत्रों के हवाले से ख़बर है कि तमाम भाजपा नेता जिनमें मंत्री भी शामिल हैं …मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह के काम करने के तरीके से नाखुश हैं।ख़ासतौर पर कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए सतपाल महाराज और उनको समर्थन करने वाले मंत्री और नेता…क्योंकि जब सरकार बनीं थी ,तो सतपाल महाराज के समर्थक उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहते थे…लेकिन ऐसा हो न सका…और इस सभी की नारज़गी  मुख्यमंत्री त्रवेंद्र सिंह रावत के ख़िलाफ चरम पर पहुंच गई। ख़बर मिली है, कि राज्य के करीब एक दर्जन नेता दिल्ली दरबार में डेरा डाल चुके हैं। इनके अलावा सतपाल खेमा भी फिर से सक्रिय हो चुका है। इस घटनाक्रम के चलते खुद मुख्यमंत्री को तबीयत ख़राब होने के बावजूद दिल्ली पहुंचना पड़ा है।

दरअसल राज्य में बीजेपी की सरकार बनने की नींव ही तमाम वरिष्ठ नेताओं की नाराज़गी पर रखी गई। क्योंकि उस वक्त राज्य के किसी नेता में इन दोनों के सामने बोलने का इतना  दमखम नहीं था, कि वो प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की जोड़ी के आगे अपनी दावेदारी पेश कर पाता…नतीजतन एक ऐसे नेता को राज्य की कमान सौंप दी गई, जिसकी उम्मीद न तो पार्टी के कद्दावर नेताओं को थी और न ही खुद मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए विधायक त्रिवेंद्र सिंह रावत को । लेकिन जब समय बलवान हो तो उसे कौन टाल सकता है। राज्य का ताज त्रिवेंद्र सिंह रावत के सिर सज गया। सरकार ने काम-काज करना शुरू कर दिया लेकिन विरोधी खेमा इस सदमें से उबरा नहीं और लगातार ऐसी परिस्थितियां तलाशता और पैदा करता रहा, कि सरकार में राजनैतिक अस्थिरता पनपने का माहौल बन सके। और आज राज्य में उठा-पठक और मुख्यमंत्री को हटाने की मांग के जो  राजनैतिक समीकरण बन रहे हैं, ये उसी नारज़गी का नतीजा हैं।

HaldwaniLive आपकी आवाज़ फेसबुक पर आज से करीब 7  महीने पहले ही राज्य में साल के अंत में होने वाली इस राजनैतिक उठा-पटक के वारे में आगाह कर चुका था।…बहरहाल  CM Trivendra Singh Rawat से नराज़ राज्य के दर्जनभर से ऊपर नेता और मंत्री दिल्ली पहुंच चुके हैं….इस घटनाक्रम के चलते खुद बीमार हालत में मुख्यमंत्री रावत को भी दिल्ली पहुंचना पड़ा है… सीएम से शुरूवात से ही नाराज़ खेमा रहा है, कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए सतपाल महाराज का…जिनके समर्थक भी मौके की नजाकत को भांपते हुए इस वार कोई भी मौका हाथ से गंवाना नहीं चाहते।

फाइल-फोटो

लेकिन अब राज्य के मुखिया को बदलने के खेल में भले ही कोई भी शामिल हो ले…लेकिन 7 महीनों से बिछ रही इस बिसात पर शह और मात के खेल का गदर  राज्य के गदरपुर पर आकर खत्म होगा…ऐसी ख़बर सूत्रों के हवाले से HaldwaniLive को मिली है।

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