हल्द्वानी लाइव – भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने क्यों थामा हाथ का साथ । आख़िर मंजू तिवारी ने क्यों छोंड़ दी पार्टी। दरअसल चुनाव आते ही, हर छोटे-बड़े नेता का चेहरा सामने आने लगता है। करनी और कथनी भी दिखने लगी है। लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद से ही बीजेपी ने कांग्रेस में सेंधमारी शुरु कर दी थी। अब तक कई नेता – कार्यकर्ता कांग्रेस छोंड़ भाजपा में शामिल हो चुके हैं। लेकिन मंगलवार को इसी अदला-बदली के खेल में कांग्रेस ने अपना पहला वाउंसर बीजेपी को दिया है । कांग्रेस ने बीजेपी को जोर का झटका धीरे से दिया है।

उत्तराखंड भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंजू तिवारी ने बीजेपी को अलविदा कह चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी का हाथ थाम लिया। मंजू तिवारी ने नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश, लोकसभा प्रत्याशी पूर्व सीएम हरीश रावत और राज्य प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह समेत तामाम वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की।

मंजू के तौर पर कांग्रेस की झोली में बीजेपी का ये पहला और एक बड़ा विकेट गिरा है। अब तक मोदी नीतियों का गुणगान करने वाली मंजू तिवारी अचानक से कांग्रेस में शामिल क्यों हो गईं, ये सवाल सबके मन में कौंध रहा होगा। चलिए हम बताते हैं कि आखिर इलेक्शन से ठीक पहले मंजू को बीजेपी से जुदा होने की ज़रूरत क्यों पड़ी।


मंजू तिवारी की माने तो

1- बीजेपी छोंड़ने की बड़ी वजह है बीजेपी में महिलाओं की उपेक्षा होना, उन्हें उचित सम्मान और ओहदा न मिलना।
2- भाजपा को अलविदा कतहने की दूसरी बड़ी वजह है, पार्टी द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी की उपेक्षा करना, जिससे वो आहत थीं, मंजू की माने तो उनके अलावा पार्टी के तमाम कार्यकर्ता भी उनकी तरह पार्टी से नाराज़ हैं।
3- मंजू की माने तो बीजेपी अब पैसा उगाहने वाली पार्टी बन चुकी है, मतलब फाइनेंसरों की पार्टी।
4- चौथी वजह है कि बीजेपी की कथनी और करनी में बेहद अंतर आ गया है। जिसकी वजह से मंजू तिवारी ने बीजेपी का त्याग कर दिया। ये तो वो वजह थीं, जिन्हें मंजू ने मीडिया को गिनाया जिसके चलते उन्होंने भाजपा छोंड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया।

ये है बीजेपी छोंड़ने की असली वजह

मंजू तिवारी के बीजेपी छोंड़ने की असल वजह दरअसल सत्ता का सुख न मिलना है। जिसका दर्द उन्हें लंबे वक्त से परेशान कर रहा था। सूत्रों की माने तो मंजू चाहती थीं कि उन्होंने पार्टी (बीजेपी ) के लिए जो अपनी सेवाएं दीं, बीजेपीमहिला प्रदेश अध्यक्ष पर रहते हुए उन्होंने पार्टी को बूथ स्तर पर खड़ा किया, लेकिन पार्टी ने उनको वो सम्मान यानि कि वो ओहदा नहीं दिया जिसकी वो हकदार थीं।

त्रिवेंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव की घोषणा से कुछ ही पहले दो बार मंत्रिमंडल में विस्तार किया। लेकिन उनके साथ और उनसे जूनियर महिला नेत्रियों को त्रिवेंद्र सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा तक दे दिया, लेकिन महिलाओं के बीच बीजेपी को मजबूत करने वाली मंजू के हाथ कुछ नहीं आया, लिहाजा मंजू खुद को ठगा महसूस करने लगीं। और इसी का पूरा फायदा उठाया, विपक्षी हाथ ने, जिसने मौका देखते ही चौक्का जड़ दिया।

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