Haldwani Live देहरादून शनिवार के रोज़ उत्तराखंड की राजधानी देहरादून जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठी। जय श्री राम के उद्घोष के अलावा फिज़ाओं में तमाम और नारे भी गूंज रहे थे। वो नारा था, घर-घर भगवा छायेगा, रामराज फिर आयेगा। राम लला हम आएंगे, मंदिर भव्य बनाएंगे और इनमें एक सबसे उत्तेजनापूर्ण और बेहद अलग नारा था…जिसे आपको नीचे लगे वीडियो में दिखाने के साथ-साथ सुनवाएंगे भी।

Dehradun VHP BAJRANG DAL
ऐसे मनाई “बजरंग दल और वीएचपी” कार्यकर्ताओं ने “हनुमान जयंती”

दरअसल Dehradun की सड़कों पर धर्म की राजनीति से प्रेरित Bajrang dal के कार्यकर्ताओं का ये एक विशाल जुलूस था। कहने को तो ये जुलूस प्रभु श्रीराम के भक्त हनुमान जी की जयंती के तौर पर निकाला गया। लेकिन भगवान के नाम पर भक्तों का ध्यान कम और धर्म की राजनीति पर ज्यादा दिखाई दिया। यकीं न हो तो आगे पढ़िए और नीचे लगा वीडियो देखना कतई न भूलें।

ये हम नहीं कह रहे। ये कह रही हैं वो आयतें जो धर्म के नाम के नाम पर , आस्था के नाम पर , लोगों के भरोसे के नाम पर देहरादून की हंसी वादियों में शनिवार के रोज़ गूंज रहीं थीं। क्योंकि अगर ये जुलुस वाकई में हनुमान जयंती के नाम पर निकाला गया होता, तो इसमें न मंदिर आता और न मंदिर की राजनीति और न ही केंद्र सरकार  और न ही  Supreme Court उच्च-न्यायालय का ज़िक्र।

केंद्र सरकार और न्यायपालिका को खुली चुनौती !

लेकिन धर्म के नाम पर  इस जुलूस में जमकर राजनीति से प्रेरित नारों की गूंज खुलेआम सुनाई दी। हमारी ये रिपोर्ट किसी के धार्मिक विचारों को ठेस पहुंचाने वाली कतई नहीं है। बल्कि वो सच है जिसे हर किसी ने आंखों से देखा और कानों से सुना। क्योंकि अगर वाकई ये जुलुस हनुमान जी के लिए समर्पित था, तो इसमें धर्म की राजनिति को बिल्कुल नहीं होना चाहिए था। लेकिन ऐसा हुआ।

2019 चुनाव की “बिछी विसात”

हनुमान जयंति तो धर्म की राजनिति करने वालों के लिए एक सुनहरा मौका बनकर आया। जिसे विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने पूरी तरह कैश कराया। यकीं न हो तो एक बार इस वीडियो को ज़रूर देखें। क्योकि अगर वाकई ये हनुमान जयंती का जुलूस था, तो इसमें उत्तेजना पैदा करने वाले ये नारे आख़िर क्यों और किसलिए लगाये गये।

जानकारी के मुताबिक इस मौके पर vhp विश्व हिंदु परिषद के अंर्तराष्ट्रीय सह महामंत्री ( संगठन ) Vinayak Rao Desh Pande  ने अपने ओजस्वी विचार रखे। विनायक राव देश पांडे ने खुलेआम ये घोषणा कर दी, कि आने वाले दिसंबर के महीने की 6 तारीख सन् 2018 को कभी भी हिंदुओं की आस्था के प्रतीक राजा श्री राम की जन्म स्थली पर राम मंदिर के भव्य निर्माण के लिए कार सेवा का आवाह्न हो सकता है। जिसके लिए संपूर्ण हिंदू समाज मंदिर निर्माण की कार सेवा के लिए तैयार रहे।

मंदिर निर्माण के लिए रहें तैय्यार – वीएचपी

एक और पूर्व उत्तेजना पैदा करने वाली घोषणा, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी पांडे ने कर दी। ये घोषणा थी, कि जिस तरह से साल 1992 की 30 अक्टूबर और 2 नवंबर की तारीख को देशभर के हिंदुओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए जिस शक्ति का प्रयोग 6 दिसंबर 1992 को ढांचा ढहा कर किया था, उसी शक्ति का इस्तेमाल दोवारा होगा। मतलब समझेंगे, तो आप ही समझ आ जायेगा।

फोटो- गूगल

बात यहीं तक होती तो गनीमत थी। हुनमान जयंती के नाम पर धर्म की आढ़ में निकाले गये इस जुलूस में एक और उत्तेजना पूर्ण वयान पांडे की जुवान ने जारी किया। जिसमें केंद्र सरकार को दरकिनार तो किया ही गया, साथ ही न्यायप्रणाली को VHP के  पांडे जी ने राम मंदिर मामले में फैसला आने से पहले ही चुनौती दे दी। पांडे ने साफ साफ दो टूक शब्दों में  सरकार और न्यायालय को सीधे चेतावनी दे डाली,  कि वो अध्यादेश लाएं या न्यायालय अपना कोई भी फैसला दे,अब हिंदू समाज और इंतज़ार नहीं करेगा। प्रभु श्री राम के मंदिर का निर्माण तो अब हर हाल में होकर रहेगा। ये केवल वीएचपी के पदाधिकारी पांडे का वयान ही नहीं है, बल्कि हमें गूगल पर सर्च करने पर वो तस्वीर भी मिली जिस पर वीएचपी का लोगो लगा है, और राम मंदिर के निर्माण करने की तारीख वहां भी दर्ज कर दी गई है।

तय हो चुकी है “तारीख़” !

बहरहाल वीएचपी के पदाधिकारी पांडे जी ने उस धुंधली तस्वीर को एक साल पहले ही पूरी तरह साफ कर दिया है। जिस तरह से VHP यानी विश्व हिंदू परिषद के अंर्ताराष्ट्रीय पदाधिकारी विनायक राव देश पांडे ने देहरादून में वयान दिये, वो ये साफ करने के लिए काफी हैं, कि आने वाले नये साल से पहले, मतलब सन् 2019 के चुनावों से ठीक पहले, चुनाव की पूरी रणनीति बनाई जा चुकी है। चुनाव मुद्दों पर नहीं, विकास पर नहीं, धर्म के नाम पर, आस्था के नाम पर, हिंदुत्व के नाम पर, भगवा के नाम पर और प्रभु श्री राम के नाम पर ही लड़ा जाएगा। और एक बात और ध्यान रहे कि इस बार चुनाव की  लड़ाई किसी पोस्टर वैनर से नहीं होगी, बल्कि पांडे जी के मुताबिक अबकी बार ये लड़ाई 1992 में ढांचा गिराने और हिंदू कारसेवकों के उस वक्त के जोश से भी कहीं ज्यादा जोशीली होगी। उम्मीद है, कि इस रिपोर्ट का सार हर पढ़ने वाले की समझ में ज़रूर आयेगा।  जय श्री राम। Jai Shri Ram

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