सरकार : मन में आग और लेखनी में तपिश है…और मत सुलगाओ…बाज आओ..!

          मन में आग है…और…लेखनी में तपिश…इसे और न सुलगाओ..!

उत्तराखंड #HaldwaniLive घोटाला राज्य उत्तराखंड…भ्रष्टाचारी राज्य उत्तराखंड…विकास से कोसों दूर हमारा राज्य उत्तराखंड…पलायन की मार झेल रहा हमारा राज्य उत्तराखंड…बेरोज़गारी से जूझ रहा हमारा राज्य उत्तराखंड…राज्यकर्मियों को सेलरी देने के आर्थिक संकट से जूझ रहा हमारा राज्य उत्तराखंड…तमाम तरह के सरकारी शोषण से जूझ रहे तमाम विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों वाला राज्य उत्तराखंड…राज्य में बने सिडकुल से भागते उद्योगों वाला राज्य उत्तराखंड…राज्य आंदोलनकारियों की लाश पर बना हमारा राज्य उत्तराखंड…और इस सबके बावजूद हमारे सपनों का हमारा प्यारा सा खूबसूरत राज्य उत्तराखंड…

मन में आग है और लेखनी में तपिश…जी चाहता है कि शब्दों के वाण से हमारे राज्य को दर्द देने वालों को हर रोज़ झुलसाऊं…लेकिन अपने राज्य के लोगों का ख्याल आ आता है…तो थोड़ा ठहर सा जाता हूं…मन को शांत कर लेता हूं…वो राज्य जिसे हमने अपने सपनों में जिया…वो राज्य जिसे हमने अपनों की लाशों पर बनते हुए देखा…हमारा वो ही राज्य दिशा और दशा दोनों भटक चुका है…लेकिन अब भी वक्त है कि वो संभल जाएं…वरना आने वाला वक्त उन्हें समझा देगा…

राज्य को दीमक की तरह राजनैतिक दलों के तमाम नेताओं के साथ साथ राज्य के आला अधिकारियों ने खा लिया…खुद को आर्थिक तौर पर मजबूत करके राज्य को आर्थिक तौर पर कंगाल बना दिया…किसी ने केदारनाथ आपदा में मरने वालों की लाश के नाम पर पैसा खाया, तो किसी ने उन लाशों को ढूंढने के नाम पर…तो किसी ने लाशों के मिले कंकालों के डीएन टेस्ट के नाम पर…बात यहीं तक होती तो ग़नीमत थी…लूट-खसोट के इस खेल में राजनैतिक दलों ने अपना मुंह इस क़दर खोला कि राज्य के तमाम ईमानदार अधिकारियों को ट्रांसफर पोस्टिंग के नाम पर इधर से उधर किया जाने लगा…हालात बद् से बद्तर हुए…तमाम ईमानदार काम करने वाले अधिकारियों को दूर दराज के पहाड़ी इलाकों में तैनाती दे दी गई…जानते हैं क्यों सज़ा के तौर पर…जी हां पहाड़ों पर जल्द कोई अधिकारी जाना नहीं चाहता…क्योंकि वहां ऊपरी कमाई के कोई साधन नहीं…महज सेलरी पर ही पूरी तैनाती काटनी होती है…हालात ये हैं कि राज्य के शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासनिक अमले को संभालने वाले आला अधिकारी जो पहाड़ पर तैनात हैं…जिनमें पुरुष और महिला अधिकारी दोनों ही शामिल हैं….कई सालों से अपने घरवार से दूर…यहां तक कि बच्चों से दूर रहकर अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभा रहे हैं…यहां तक कि अपनी सैलरी से मिलने वाली आय का एक हिस्सा तक अपने महकमें के ऊपर ख़र्च कर रहे हैं…लेकिन सरकार है, कि ऐसे अधिकारियों के काम को नज़र अंदाज़ करके उन्हें मानसिक तौर पर शोषित कर रही है…वर्तमान सरकार ही नहीं, बल्कि पिछली सरकार भी कुछ इसी रवैय्ये पर काम कर रही थी…वहीं दूसरी ओर राज्य के मैदानी ज़िलों में यानि ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, हल्द्वानी, रुढ़की, जैसे ज़लों में तैनाती के लिए आई और गई सरकारें अपने मन पसंद के आला अधिकारियों को तैनाती देती आ रही हैं…जानते हैं क्यों…क्योंकि ये वो ज़िले हैं जिनसे इन राजनैतिक दलों के दलालों को भरपूर आर्थिक भोजन मिलता रहा है…इन ज़िलों में तैनाती की लड़ाई का ताज़ा नमूना…हाल ही में हुए PCS Officers के ट्रांसफर लिस्ट में भी देखने को मिला…और नतीजा सामने आया कि अधिकारी सरकार की इस तबादला लिस्ट के ख़िलाफ़ ही माननीय हाईकोर्ट की शरण में जा पहुंचे…

आपको बताएं कि अधिकारी कोई बेईमान नहीं होता…वो जज़्बा लेकर अपनी नौकरी को पूरी ईमानदारी के साथ निभाने की ख़ातिर मैदान में उतरता है…लेकिन राजनैतिक दलों के दलाल एक एक कर इन अधिकारियों की ईमानदारी और जज़्बे को रौंदते हुए इनको इतना मानसिक तनाव दे देते हैं…कि वो न चाहते हुए भी इस गंदगी में मन मारकर उतर जाता है…आखिर उसे भी अपने परिवार का पेट पालने का हक़ है…अपने राज्य में सत्ताशीन और रह चुके …राजनैतिक दलों के दलाल ट्रांसफर पोस्टिंग के खेल में महारत हासिल कर चुके हैं…ख़नन और शराब माफिया राज्य में इस कदर हावी हो चुका है, कि वो बेख़ौफ़ होकर अपने काम को अंजाम दे रहा है…और अधिकारी चांहकर भी उसका बाल-वांका भी नहीं कर पातें…जानते हैं क्यों, क्योंकि उनके भी छोटे-छोटे बच्चे और परिवार हैं…पिछली सरकार में ट्रांसफर पोस्टिंग का सिंडिकेट अधिकारियों पर इस कदर हावी हो चुका था…कि उस वक्त के मौजूदा मुखिया को भी उसकी भनक तक नहीं लगती थी…हालात सबके सामने आये…राज्य के उस वक्त के मुखिया के स्टिंग ऑपरेशन के रुप में…जिसमें वो खुद कहते दिखे….कि देने को पैसा नहीं है…चाहें तो जमकर कमा लेना…मैं आँखे मूंद लूंगा…शर्म आती है ,जब लोग अपनी ही जन्म और कर्म भूमि को बेंचने पर आमादा हो जाते हैं…लेकिन फल भी तो यहीं भुगतना पड़ता है…लिहाज़ा करारी शिकस्त के तौर पर ता-उम्र रिसने वाली सज़ा नसीब होती है…लेकिन एक सच ये भी है, कि उस शिकस्त खाये शख्स पर पैसा वाकई नहीं…क्योंकि उसके नाम पर कमाई तो सिपाहसालरों ने की थी…लिहाज़ा अब वो भगवान से पूछना चाहते हैं, कि आख़िर उन्हें ऐसी हार क्यों झेलनी पड़ी…मतलब ये कि वक्त के शिकस्त देने के बावजूद अभी तक वो सच्चाई को नहीं समझ पाये…वहीं राज्य की वर्तमान सरकार में भी हालात कुछ ऐसे ही दिख रहे हैं…राज्य का एक पूर्व मुख्यमंत्री एक कोरड़पति अधिकारी ( अब बर्खास्त…जेल में ) से फॉरच्यूनर गिफ्ट में ले लेता है…उसका शागिर्द भी साथ में एक के साथ एक फ्री वाले गेम में शामिल हो जाता है…लेकिन सरकार हैं… कि सब कुछ जानते हुए भी खामोश हैं…और राज्य की अनपढ़ और पढ़ी लिखी जनता को जताने के लिए वयान देते हैं कि भ्रष्टाचार पर कोई समझौता नहीं होगा…क्योंकि उनकी सरकार एनएच घोटाले में अब तक 15 अधिकारी – कर्मचारियों को जेल भेज चुकी है…वो ये भी कहते हैं, कि हर ग़लत काम करने वाले को सज़ा ज़रूर मिलेगी…वो राज्य की पुलिस पर तोहमत लगाते हुए ये भी कहते हैं, कि पुलिस अपराध खोलने और विवेचना के नाम पर ना तो किसी से गाड़ी और न ही पैसे मांग सकती है…क्योंकि सरकार ने पुलिस के लिए पर्याप्त बजट की व्यवस्था जो कर रखी है…

सरकार ये तो बहुत ना-इंसाफी हुई न…क्योंकि अभी अभी वो कहावत याद आ गई…कि उल्टा चोर कोतवाल को डांटे…जनता की आवाज़ को कोई दवा नहीं सका है…मैं और मेरे जैसा तमाम पत्रकार जनता की आवाज़ को उठाएंगे…और हां जनता… ये तो तुम्हें ही तय करना है,कि तुम्हारे सपनों का उत्तराखंड तुम्हारी पार्टियों से छोटा है या बड़ा…क्योंकि ये खुद मैं तय करता हूं कि मेरी पत्रकारिता का पेशा…दलाली है या दलालों की कयामत…!               

 

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2 thoughts on “सरकार : मन में आग और लेखनी में तपिश है…और मत सुलगाओ…बाज आओ..!

  • February 5, 2018 at 8:06 am
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    शानदार शानदार शानदार ।
    बहुत बढ़िया ।

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  • February 5, 2018 at 10:57 pm
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    जो भी लिखा हैं,बहुत खूब लिखा हैं।

    नमन है आपकी पत्रकारिता और कलम को।

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