उत्तराखंड – श्रीनगर पौड़ी गढ़वाल- हल्द्वानी लाइव– कोरोनाकाल में कोरोना ने हमें जिंदगी के तमाम महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाए, लेकिन हम इंसानों की फितरत ही कुछ ऐसी है कि हम कभी सुधर ही नहीं सकते।

इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली ये वारदात अपनी देवभूमि से ही आई है। मामला है श्रीनगर पौड़ी गढ़वाल इलाके के बेस अस्पताल श्रीकोट का है। खुलासा हुआ है कि यहां कोविड-19 से एक महिला की मौत हो गई। और मृत महिला के शव से कुंडल और गले में पड़ी चेन भी गायब हो गई। ऐसा उस मृतक महिला के संबधी का आरोप है।

दरअसल ये सारी घटना मृतक महिला के बेटे ने सुनाई जो खुद श्रीनगर के सभासद हैं। नाम हैं इनका विभोर बहुगुणा। विभोर के मुताबिक जब उन्हें इस घटना का पता चला तो उन्होंने फौरन इसकी शिकायत ज़िलाधिकारी पौड़ी से की।

शिकायत में सभासद विभोर ने राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से संबद्ध बेस अस्पताल की स्वास्थ सेवा पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप में विभोर कहते हैं कि 8 सितंबर को उनकी मां कोरोना पॉजिटिव मिलीं। अगले ही दिन 9 सितंबर को उन्हें बेस अस्पताल श्रीकोट में भर्ती करवाया गया। और इलाज के दौरान 21 सितंबर को उनकी मौत कोविड-19 से हो गई।

सभासद विभोर खुलासा करते हैं कि अंतिम संस्कार के लिए दिये गये शव को अस्पताल प्रशासन ने ठीक से पैक तक नहीं करवाया जबकि मौत कोविड-19 से हुई थी। आरोप है कि जिस किट में मां का शव रखा गया था, वो किट फटी हुई थी। दूसरी किट मंगाने पर उसकी चेन भी खराब निकली।और इस दौरान जब उनकी नजर शव पर पड़ी तो उनकी मां के शव से कुंडल और चेन गायब थे।

लेकिन यहां पर कई महत्वपूर्ण सवाल अस्पताल पर आरोप लगाने वाले सभासद विभोर पर भी खड़े होते हैं…तो वहीं अस्पताल भी शक के घेरे से बच नहीं सकता।

  1. सवाल नंबर 1– जब सभासद विभोर को मालूम चला की मां कोरोना संक्रमण है तो अस्पताल में मां को भर्ती करवाने से पहले उन्होंने अपनी मां के कीमती जेवर उतार कर घर पर ही क्यों नहीं रखे।
  2. हो सकता कि जल्दवाजी में विभोर ये करना भूल गये तो अस्पताल में किसी भी शख्स को भर्ती करने से पहले उसके सारे गहने उतार दिये जाते हैं और वो भी तब जब मरीज कोविड-19 से संक्रमित हो।
  3. सवाल नंबर तीन – जब मरीज़ की मौत कोविड 19 से हुई तो ऐसी स्थिति में शव की पूरी तरह से पैकिंग होती है,और ऐसे मरीजों का शव भी घर वालों को नहीं दिया जाता , तो फिर विभोर को उनकी मां का शव जो कोविड संक्रमण से मरीं, क्यों दिया गया ?
  4. सवाल नंबर 4 – क्यों शव को पैक करने से पहले विभोर ने इस बात की तस्दीक नहीं की, कि उनकी मां के शरीर पर पड़े गहने कहां हैं? अस्पताल प्रशासन से उन्हें पूछना चाहिए था। और अस्पताल प्रशासन को भी ये जानकारी विभोर को स्वंय देनी चाहिए थी।
  5.  सवाल नंबर पांच– सबसरे बड़ी लापरवाही कि आखिर कोविड संक्रमण से मरे शख्स की डेडवॉडी परिवलार को अस्पताल ने क्यों सौंपी..
  6. सवाल नंबर छ: –  कि अस्पताल ने ऐसे कैसे पैकिंग की थी, कि कोविड संक्रमित मरीज का पैक शव का चेहरा पूरी तरह से खुला हुआ था और परिवार ये देख पाया कि उनके गले से चेन और कान से कुंडल गायब हैं…

ये सारे सवाल अपने आप में न सिर्फ अस्पताल की भयानक लापरवाही को वयां कर रहे हैं बल्कि विभोर की लापरवाही को भी बता रहे हैं।जिन्हें इस बारे में अस्पताल से पहले ही सवाल जबाव क्कयों नही किये। जब उन्हें कोविड-19 से संक्रमित मां के शव को पूरी तरह पैक करके नहीं दिया जा रहा था।तो वहीं अगर मृतका के शरीर से इलाज के दौरान गहने गायब हुए तो ये मामला बेहद संगीन है और उससे भी ज्यादा संगीन तब और बन जाता है जब शव को बिना पूरी तरह सील किये डेडवॉडी को घरवालों के हवाले कर दिया गया।

बहरहाल जिलाधिकारी धीरज गर्ब्याल ने सभासद विभोर को पूरे मामले की जांच का भरोसा दिया है तो वहीं श्रीकोट बेस अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केवी सिंह ने भी मामले की जांच कराने की बात कही है।  लेकिन ये मामला इसानियत को तार-तार कर देने वाला है।

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