दलित मंत्री और विधायक भी नहीं कर सके बीमार “दलित छात्रों” की मदद…ज़रा सोंचिए…!

#नैनीताल #HaldwaniLive #BolHaldwaniBol आवाज़ बनेगा भवाली रोड पर बने पाइंस-हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की…क्योंकि छात्र ही हमारे शहर का वो चेहरा हैं, जो आने वाले वक्त में शहर को अपने हुनर से एक और नई पहचान दिलाएंगे…लेकिन अगर यही छात्र…सरकारी और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं का शिकार हों जाएं…तो कैसे शहर…शहर से राज्य…और राज्य से देश की तस्वीर संवरेगी…तस्वीर संवरने से पहले ही बिख़र जायेगी। कुछ ऐसी ही बिख़रती तस्वीर सामने आ रही है, भवाली रोड पर बने पाइंस-हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की…जिनमें से 10 छात्र कच्चे चावल और अरबी की सब्जी खाने से बीमार पड़ चुके हैं…पाइंस-हॉस्टल में फैली अव्यवस्था का आलम ये है कि सर्द मौसम में यहां रह रहे छात्रों को ठंडे-ठंडे-कूल-कूल पानी से नहाना पड़ रहा है…जो उनकी बीमारी की एक और बड़ी वजह बनकर सामने आ रहा है।

File-Photo
    हॉस्टल-वॉर्डन का आत्याचार – सर्दी में भी ठंडे पानी से नहाने को मजबूर छात्र 

पाइंस-हॉस्टल की दुस्वारियों की ये सच्ची तस्वीर पहली बार सामने नहीं आई है…अपने हल्द्वानी वाले जो मंत्री जी हैं न…वो ही समाज कल्याण वाले…अरे वो ही यशपाल आर्या जी न …हां वो भी नैनीताल से विधायक बने अपने बेटे संजीव आर्या के साथ पाइंस-हॉस्टल का औचक…मतलब अचानक पहुंच कर हॉस्टल का निरीक्षण भी कर चुके हैं…लेकिन इस छात्रावास के अधीक्षक महोदय इतने ढीट हैं, कि अपने ही मंत्री और विधायक के आदेशों को दरकिनार कर दिया…मतलब न मंत्री जी की चली और न ही विधायक जी की…चल रही है तो सिर्फ छात्रावास के अधीक्षक की…सच में गज़ब का माहौल चल रहा है अपने यहां…एक बात और बताए,सुनकर आपको हंसी भी आयेगी और गुस्सा भी, दरअसल ये जो पाइंस छात्रवास है..ये न,  दलित वर्ग के छात्रों का बसेरा है…और जो इस हॉस्टल में मंत्री जी और विधायक जी औचक दौरे पर पहुंचे थे न…वो भी अपने ही इलाके के राज्य के इकलौते बड़े दलित नेता माने जाते हैं…यशपाल आर्या, समाज-कल्याण मंत्री, उत्तराखंड-सरकार संजीव आर्या, विधायक, नैनीताल

समाज-कल्याण मंत्री पिता और विधायक बेटा भी “नहीं कर सके दलित छात्रों की मदद” लेकिन हुआ क्या…दलित छात्रों के लिए बने हॉस्टल में दविश देने के बाद भी दलित नेता यशपाल आर्या और उनके विधायक बेटे संजीव आर्या…अपने ही समाज से जुड़े छात्रों को एक वक्त का बढ़ियां खाना तक मुहैय्या नहीं करवा पाये…चलिए खाना भी छोड़िए…कम से कम ठंडे-ठंडे-कूल-कूल पानी की जगह बच्चों को गरम पानी की व्यवस्था तो आप दोनों लोग करवा ही सकते थे न…लेकिन वो भी आप से हो न सका… या फिर यूं कहें कि, आपकी तो अधिकारी लोग…अरे आला-अधिकारियों को भी छोड़िए…आपकी तो छात्रावास का अधीक्षक तक नहीं सुन रहा…

फिर क्या…मंत्रीजी और उनके बेटे के आदेश पर भी पानी फेरने वाले छात्रावास अधीक्षक की शिकायत लेकर बेचारे छात्रों को मजबूरन भीमताल जाकर समाज कल्याण अधिकारी को अपनी आप-बीती सुनानी पड़ी। सिस्टम से जूझते छात्र बता रहे थे…कि सर ठंडे पानी से न नहायें तो क्या करें…वॉर्डन साहेब तो बोरिया-बिस्तर उठाकर घर जाने को बोल चुके हैं…बस वॉर्डन साहेब जो थे…हमारी हीटर पर पानी गरम करने वाली बात पर भड़क गये…अब सर आप ही बताएं…खाने के नाम पर ठंड में अरबी की कच्ची सब्जी-कच्चे चावल खिला रहे हैं…और ठंडे पानी से नहलवा रहे हैं…तो सर बीमार  हम नहीं पड़ेंगे तो कौन पड़ेगा…बताइये सर…बताइए…आप ही बताइए…हमारे 10 साथी बीमार पड़े हैं.

त्रिवेंद्र सिंह रावत , मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
दलित मंत्री और छात्रों की नहीं हो रही सुनवाई…कुछ करिए सीएम साहेब…!

राज्य के मुख्यमंत्री साहेब अगर आप को फुर्सत मिले… तो ज़रा इन गरीब दलित छात्रों की समस्याओं पर भी गौर कर लें…क्योंकि मोदी जी के राज में अगर छात्र ही ये कहने लग जाएं…कि शोषित वर्ग का होने के वजह से उनकी परेशानियों पर अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे और दलित मंत्री कुछ करवा नहीं पा रहे तो आपके मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का फायदा क्या…कुछ करिए मुख्यमंत्री जी…प्रधानमंत्री जी का नाम तो ख़राब मत होने दीजिए न…और इन अधिकारियों को भी ज़रा कड़ा वाला संदेश दीजिए…ताकि कम से कम मंत्री जी  के फरमान की तमील तो हो सके…            

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2 thoughts on “दलित मंत्री और विधायक भी नहीं कर सके बीमार “दलित छात्रों” की मदद…ज़रा सोंचिए…!

  • December 27, 2017 at 7:29 pm
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    बहुत अच्छा लिखा गया है । शानदार और निर्भीक पत्रकारिता । लेकिन अफसोस कि प्रदेश की राजनीति के बड़े नाम भी कुछ नही कर सके इस मामले में ।

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    • December 28, 2017 at 9:43 pm
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      Thanks for your Valuable Comments. Unbiased Journalism will be Continue @ Haldwanilive.in

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