“सरकार” की फिर हुई फजीहत , निकाय सीमा विस्तार मामला

Nainital High Court cancelled government notification
निकास सीमा विस्तार नोटिफिकेशन पर “सरकार” की फ़जीहत

नैनीताल #HaldwaniLive अपने “सरकार” ने तो हद ही कर रखी है, एक तरफ सरकार राज्य कर्मचारियों को सेलरी देने के लिए लोन लेने पर आमाद है, तो दूसरी ओर देहरादून में मेट्रिनों यानि एयर-टैक्सी चलाने की प्लॉनिंग बना रही है, वजह है जनता को जाम से निजात दिलाई जायेगी। सच में बड़ी ही गज़ब सरकार है। गज़ब इसलिए भी क्योंकि आनन-फानन में आम जनता के विकास को दरकिनारकर अजीब से फैसले ले रही है। और इन्हीं अजब फैसलों के चलते हर बार सरकार को नैनीताल हाईकोर्ट से मुंह की खानी पड़ रही है। दरअसल इस बार मामला तबादला लिस्ट का नहीं है बल्कि मामला है,निकायों का सीमा विस्तार । जिसमें एक बार फिर सरकार को Nainital High Court से फजीहत झेलनी पड़ी है। 

मामला शुरू होता है 24 नबंवर 2015 को एक सरकार के एक नोटिफिकेशन के साथ। जिसमें सरकार ने उस वक्त सेंट्रल होप टाउन ग्राम पंचायत के सक्बे को नगर पंचायत सेलाकुई में शामिल कर लिया। सरकार ने बाकायदा इसका नोटिफिकेशन भी जारी किया। लेकिन तभी सरकार के खिलाफ सेंट्रल होप टाउन की ग्राम प्रधान और दूसरे लोगों ने मिलकर सरकार के इस कारनामें के खिलाफ Nainital High Court में एक याचिका दायर कर दी। सरकार के इस Notification के खिलाफ़ हाईकोर्ट में अपील करने वाले लोगों ने आरोप लगाया, कि सरकार ने बिना किसी सुनवाई का मौका दिये ही वो नोटिफिकेशन जारी कर दिया था।

न्यायालय में पूरे मामले की सुनवाई शुरू की । वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की। और सरकार के नोटिफिकेशन को निरस्त करते हुए आदेश दिया, कि जनता को 6 सप्ताह में सुनवाई का मौका दिये जाये।

जबकि अभी पिछले दिनों ही मा. न्यायालय ने निकायों के सीमा विस्तार मामले की 11 याचिकाओं पर सुनवाई की थी। जिसमें सरकार को यथास्थिति बनाने का आदेश दिया था। इस आदेश से सरकार की बहुत किर-किरी हुई। जिन निकायों पर मा. कोर्ट ने यथास्थिति बनाये रखने का सरकार को देश दिया था, उनमें Dehradun , ऋषिकेश, Haldwani भी शामिल हैं।

बहरहाल सेंट्रल होप टाउन सेलाकुई ग्राम पंचायत को नगर पंचायत में शामिल करने के नोटिफिकेशन पर झटका खाई सरकार को अब सोंचने का वक्त है। कि वो अपने वोट बैंक को बढ़ाने का चक्कर छोड़ें। राज्य के विकास को गति देने के काम में जुटे। और आय के नये स्रोत खोजे, ताकि राज्य कर्मचारियों को वेतन देने के लिए रिर्जव बैंक के आगे सरकार को लोन लेने के लिए हाथ न फैलाने पड़ें।              

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