उत्तराखंड : एक ही झटके में … 100 साल पुरानी “सामंती व्यवस्था” का अंत..!

नैनीताल हाईकोर्ट ने किया 100 साल पुरानी व्यवस्था का खात्मा
उत्तराखंड से 100 साल पुरानी सामंती व्यवस्था का हुआ अंत

नैनीताल #BolUttarakhandBol देश 22वीं सदी की ओर अग्रसर है…और हमारा राज्य आज तलक सामंती व्यवस्था का शिकार…लेकिन इस व्यवस्था का शिकार कर इसे खत्म कर दिया है हमारी न्याय व्यवस्था ने…

अंग्रेजों की हुकूमत के गुलाम भारत की तस्वीर राजस्व पुलिस के रूप में आज तक हमारे अपने उत्तराखंड राज्य में जिंदा थी…लेकिन 100 साल से जिंदा अंग्रेजी हुकूमत की इस व्यवस्था को एक ही झटके में उखाड़ फेंका उत्तराखंड हाईकोर्ट ने…और अगले 6 महीने के अंदर राज्य सरकार को इस सामंती व्यवस्था से राज्य को पूरी तरह से आजाद करने के आदेश हाईकोर्ट ने पारित किये हैं…

दरअसल शुक्रवार को मा. हाईकोर्ट में दहेज हत्या से संबधित एक विशेष अपील की सुनवाई हुई…इस सुनवाई को वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने की… जिसे मा.न्यायाधीश ने निरस्त करते हुए अभियुक्त की आजीवन कारावास की सज़ा को बरकरार रखा। वो 23 दिसंबर का दिन था और साल था 2011…जब दिहरी गढ़वाल के गांव गवाना पट्टी डागर के निवासी बचन दास ने Revenue Police #राजस्वपुलिस में प्राथमिकी रिपोर्ट दर्ज़ करवाते हुए कहा था…कि उनकी बेटी रामेश्वरी को ससुराल वालों ने दहेज के चलते क़त्ल कर दिया…21 दिसंबर 2012…को मामले की सुनवाई निचली कोर्ट में हुई…और अभियुक्त पति सुंदर लाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई…इस मामले की अपील मा. हाईकोर्ट की विशेष अदालत के सामने पहुंची…लेकिन यहां भी जुर्म को देखते हुए आजीवन कारावास की सज़ा को बरकार रखा गया…लेकिन पूरे मामले की तह तक पहुंची विशेष अदालत ने एक अहम व्यवस्था पर बहुत ही पैनी निगाहों से गौर फ़रमाया…दरअसल ये व्यवस्था थी राज्य के पहाड़ी इलाकों में तैनात राजस्व पुलिस…और उसका काम देख रहे पटवारी…जिन्हें कानूनी तौर पर सामंती व्यव्स्था के तहत पुलिस के अधिकार दिये गये थे…मा. हाईकोर्ट ने की विशेष अदालत ने फौरन ही इस व्यवस्था का आंकलन कर इस भी लगे हाथ फैसला कर दिया…और जो फैसला किया वो वाकई हमारे राज्य के लिए बेहद अहम साबित होगा…ये फैसला है…कि अगले आने वाले 6 महीनों के भीतर राज्य सरकार को पहाड़ी इलाकों में तैनात #RevenuePoliceSystem / राजस्व पुलिस – पटवारी की जगह रेगुलर पुलिस की व्यवस्था करनी होगी। और साथ राज्य के किसी भी पहाड़ी क्षेत्र में 6 महीने के बाद, कहीं भी राजस्व पुलिस में न तो प्राथमिक सूचना दर्ज की जायेगी और न ही राजस्व पुलिस के द्वारा उस मामले की जांच होगी…

माननीय हाई कोर्ट ने आदेश में ये भी कहा है कि जिस तरह से राज्य की आबादी एक करोड़ से अधिक है…उसे देखते हुए पुलिस थाने बेहद कम हैं…जिनकी संख्या महज 156 है…इसलिए राज्य सरकार को 6 महीने के अंदर ही इन थानों की तदाद भी बढ़ाने के निर्देश दिये गये हैं…जिससे अपराध और अपराधी दोनों पर नियंत्रण हो सके…मा. कोर्ट ने ये भी कहा कि एक सर्किल में 2 पुलिस स्टेश होने चाहिए जिनमें थाने का संचालन सब इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी के हाथों में हो…

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One thought on “उत्तराखंड : एक ही झटके में … 100 साल पुरानी “सामंती व्यवस्था” का अंत..!

  • January 13, 2018 at 2:56 pm
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    It’s a good decision.

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