हल्द्वानी #BolHaldwaniBol तेजी से भागती दौड़ती जिंदगी में रिश्तों के मायने ख़त्म होते जा रहे हैं…न अपनापन रहा और अपनों से लगाव…रिश्तों के क़त्ल की ये एक ऐसी ही सच्ची कहानी है…हल्द्वानी के रामपुर रोड़ पर पड़ने वाले जीतपुर नेगी गांव की…अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो…लेकिन एक न एक दिन वो कानून के शिकंजे में आ ही फंसता है…रिश्तों के क़त्ल की ये वारदात भी कुछ ऐसी ही है…

हल्द्वानी के जीतपुर नेगी गांव में एक इलेक्ट्रीशियन मुन्ना लाल अपनी पत्नी, बूढ़े पिता प्यारे लाल और मां रानी देवी के साथ रह रहा था…लेकिन इस परिवार में आये दिन लड़ाई-झगड़े होते रहते थे…अभी नये साल पर 3 जनवरी को प्यारे लाल की फुफेरी बहन ओमवती उनसे मिलने पहुंची थी…तब प्यारे लाल ने बड़े ही दुखी मन से अपनी बहन को अपनी आपबीती सुनाई…बुज़ुर्ग प्यारे लाल अपनी बहन से कह रहे थे कि उनकी पत्नी और बेटा आये दिन उनके साथ मारपीट करते हैं…बटे और पत्नी की पिटाई से बुज़ुर्ग प्यारे लाल को सिर में भी चोट लगीं थी…उन चोटों को प्यारे लाल ने रोते हुए अपनी फुफेरी बहन को दिखाया…लेकिन तब बहन उन्हें समझा बुझाकर वापस लौट गईं…और घर वापस लौटकर इस सबका ज़िक्र अपने घर पर किया…

लेकिन इसी बीच एक दिन अचानक बृद्ध प्यारे लाल घर से घर से ग़ायब हो गये…न तो उन्हें आस-पड़ोस के लोगों ने देखा और न ही उनके घर के पास रहने वाले उनके छोटे भाई घासीराम के परिवार ने…परिवारों में नबन के चलते बुज़ुर्ग प्यारेलाल के छोटे भाई घासीराम के घर से उनका आना जाना कम ही था…इसलिए प्यारे लाल के छोटे भाई घासीराम के बेटे ने ओमप्रकाश ने अपने चाचा बाबूराम को फोन किया…और बताया कि ताऊ प्यारे लाल तीन-चार दिन से दिखाई नहीं दे रहे…बड़े भाई प्यारे लाल के अचानक इस तरह गुम होने का पता चलते ही भाई बाबूराम अपने भाई लीलाधर के साथ हल्द्वानी के जीतपुर नेगी गांव आ पहुंचे अपने भाई प्यारे लाल से मिलने … लेकिन भाई प्यारे लाला घर पर होते तो मिलते…

बुज़ुर्ग प्यारे लाल के दोनों भाईयों ने अपनी भाभी यानी प्यारे लाल की पत्नी रानी देवी और उनके बेटे मुन्ना लाल से उनके बारे में पूछा भी…लेकिन दोनों ने टालमटोल करनी और कहानी बतानी शुरू कर दी…इसके बाद प्यारे लाल के दोनों भाईयों ने अड़ोस-पड़ोस में पूछताछ की…तो पता चला कि नके बड़े भाई प्यारे लाल लंबे वक्त से बीमार चल रहे थे…जिसके चलते वो चल फिर भी नहीं पा रहे थे… बस यही बात दोनों भाईयों को खटक गई…दोनों को किसी अनहोनी का शक़ गहरा गया…

बुज़ुर्ग प्यारे लाल के दोनों छोटे भाई घासीराम और बाबूराम ने पुलिस के पास जा पहुंचे…और अपने बड़े भाई प्यारे लाल के अचानक घर से गायब होने की पूरी कहानी बताई और साथ ही उनकी पत्नी और बेटे मुन्ना लाल पर शक भी जताते हुए रिपोर्ट दर्ज करवा दी…और बताया कि दोनों अक्सर उनके साथ मारपीट करते थे…इस बात की जानकारी लगते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी…

कोतवाल खुशी राम पांडे ने जांच में सख्ती बरतते हुए… प्यारे लाल के बेटे मुन्ना लाल और बुज़ुर्ग की पत्नी रानी देवी को फौरन हिरासत में लिया…पुलिस की सख्ती के आगे मां और बेटे दोनों टूट गये…और रिश्तों के क़त्ल की जो कहानी वयां की उसे सुनकर खुद कोतवाल खुशी राम पांडे भी सकते में आ गये…दोनों मां बेटे बता रहे थे…कि उन दोनों ने ही मिलकर बुज़ुर्ग प्यारे लाल का क़त्ल कर, उनके शव को घर में ही दफना दिया था… पिता और पति का क़त्लनामा करते ही … कोतवाल पांडे जी ने फौरन ही मां बेटे को गिरफ़्तार कर लिया… और आरोपियों की निशानदेही पर बुज़ुर्ग प्यारे लाल के शव को घर से बरामद कर लिया…अब दोनों मां बेटे जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं…

 

 

 

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