क्या है “तीन-तलाक़”…?…जानकर रूह कांप जायेगी..!

Triple Talaq Through Social Media
सोशल-मीडिया के ज़रिए तीन-तलाक़ देने का बढ़ा प्रचलन..!

#HaldwaniLive #TripleTalaq  तलाक़ शब्द किसे अच्छा लगता है…क्या आपको अच्छा लगता है…नहीं न…मुझे भी अच्छा नहीं लगता…परिवार जोड़ने के लिए होते हैं…तोड़ने के लिए नहीं…रिश्ते बनाने के लिए होते हैं…बिगाड़ने के लिए नहीं…और जब कहते हैं, कि ऊपर वाला पहले से ही जोड़ियां तय करके रखता है…तो हम उन जोड़ियों को तोड़ने वाले कौन होते हैं…

अपना ये जो समाज है न…आज भी बहुत ही रूढ़िवादी…ढकियानूसी ख्यालातों वाला है…जिसे देखते हुए भारतीय कानून में जगह दी मिली तलाक़ को…क्योंकि इंसान की जिंदगी में कभी-कभी न चाहते हुए वो परिस्थियां पैदा होती हैं…या पैदा कर दी जाती हैं…जिसे वो अपनी जिंदगी में कभी होने देना नहीं चाहता…वो एक कहावत है न …वहीं होता है जो मंजूरे ख़ुदा होता है…लेकिन कभी-कभी इन सबका बेजा इस्तेमाल होने लगता है…धर्म और कट्टरपंथी की आढ़ में वो सब होने लगता है जिसमें ऐसे कई लोग झुलसते हैं…जो बेगुनाह होते हुए भी गुनाहगार होते हैं…या कभी-कभी गुनाहगार भी…

Meaning of Triple Talaq
क्या है तीन-तलाक़…?

मुस्लिम धर्म के पवित्र कुरान में भी तलाक़ को अच्छा क़रार नहीं दिया गया है…लेकिन इसका मतलब ये हरगिज़ नहीं कि तलाक़ का हक़ ही इंसानों से छीन लिया जाये। तलाक़ दरअसल इसलिए बनाया गया कि दो इंसान अगर रज़ामंदी से एक-साथ नहीं रह सकते तो वो अपनी जिंदगी जहन्नुम बनाने से बेहतर है कि तलाक़ लेकर अलग अपनी जिंदगी के सफ़र को आगे बढ़ाएं…जो इंसान होने के नाते कानून उनका हक़ है। यही वजह रही कि पैगम्बरों के दीन-धर्म में भी तलाक़ की गुंजाइश हमेशा से बनी रही है…चलिए ाप भी समझिए कि आख़िर… 

तीन-तलाक़” है क्या…?

दरअसल तीन-तलाक मुस्लिम समाज में शौहर-बीबी के बीच अलगाव का वो ज़रिया है जिसमें मुस्लिम शौहर अपनी बीबी को महज़ तीन बार तलाक़ बोलकर अपने निकाह यानि शादी को कभी भी तोड़ सकता है…इस नियम के मुताबिक होने वाले तलाक़ स्थिर होते हैं, और ऐसा होते ही निक़ाह ख़त्म हो जाता है…शादी खत्म…

इस तीन-तलाक की प्रकिया के बाद वो दोनों …मुस्लिम पुरुष और स्त्री दूसरे निकाह़ की अगर चाहत रखते हैं…करना चाहते हैं तो “हलाला” भरने के बाद ही दूसरी शादी मतलब निक़ाह किया जा सकता है…

Muslim Women Protest against Triple Talaq
“तीन-तलाक़” के ख़िलाफ़ क्यों लांघी मुस्लिम महिलाओं ने घर की दहलीज़… ?

ह़लाला” – इस नियम के मुताबिक तलाक़शुदा मुस्लिम महिला को पहले दूसरे मुस्लिम पुरूष के साथ निकाह करना होता है…जिसके साथ कुछ दिन बिताने के बाद एक बार फिर से इस दूसरे शौहर यानि पति से भी उस महिला को तलाक़ लेना होगा…जिसके बाद वो महिला अपने पहले वाले शौहर से दोबारा शादी करने की हक़दार होगी…निकाह कर पायेगी…मुस्लिम संप्रदाय में तीन-तलाक को तलाक़ उल बिद्दत के नाम से भी जाना जाता है।

  …दरअसल तेजी से बदलते वक्त के साथ, बदलते ज़माने और लोगों ने भी बदलाव अख्तियार कर लिया…उसकी वोही छाप तीन-तलाक़ में देखने को मिलती है…बदलते दौर में ट्रिपल तलाक के मामले इन दिनों, मोबाइल-फोनटेक्सट मैसेज़व्याहट्स-एप मैसेज़फेसबुकट्विटरस्काइप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म के ज़रिए तेजी से सामने आये। जिनमें लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है

No more Triple Talaq by Social Media
सोशल-मीडिया प्लेटफार्म के ज़रिए तीन-तलाक़ की ख़िलाफ़त पर उतरीं महिलाएं..!

…क्योंकि इस्लाम में इसकी व्याख्या यही है, लिहाज़ा मुस्लिम मर्दों को कोई फ़र्क नहीं पड़ा, इस मसले से सबसे ज़्यादा पीड़ित हुईं तो वो हैं मुस्लिम महिलाएं…जो पूरी तरह अपने शौहर पर निर्भर हैं… तीन-तलाक सिस्टम के चलते ऐसी महिलाओं को असल जिंदगी में तमाम दिक्तों को झेलना पड़ रहा था या है…मसलन आर्थिक और इमोशनल तौर पर वो पूरी तरह बिख़र रही थीं…अकेले जिंदगी की गुज़र-बसर…बच्चों को पालने की ज़िम्मेदारी समेत तमाम कई और दुश्वारियां झेलने को मजबूर हो रहीं थीं…क्योंकि अमूमन मुस्लिम समाज इस तरह के मामलों में मर्दों के साथ ही खड़ा दिखाई दिया है…क्योंकि तीन-तलाक मामलों में तलाक़ होने के बाद शौहर अपने बच्चों ख़ासतौर पर बेटियों की ज़िम्मेदारी कभी नहीं लेता…और इस तीन-तलाक़ के डर से मुस्लिम महिलाएं नरक से भी बद्तर जिंदगी गुजारने को मजबूर थीं…क्योंकि अपनी ज़िंदगी गुज़ारने के इंतज़ामात नाकाफ़ी होने के साथ-साथ इनके मन में ख़ौफ़ है या था कि इनका शऔहर कहीं इन्हें तीन-तलाक़ न दे दे…

सच में कैसी हैं ये रिवायतें…ये धार्मिक बंधन…जो कभी-कभी इंसान का जीना मुहाल कर देती हैं…लेकिन बदलते दौर ने तीन-तलाक़ के खौफ़नाक रूप को सामने लाकर उस सच्चाई से दुनिया को रूबरू करवाया…जिससे समाज के की तबके नजान थे…जो मुस्लिम महिलाओं के साथ होने वाले तीन-तलाक को महज़ एक इस्लामिक नियम समझते थे… बहरहाल लोक सभा में तीन तलाक बिल पास होने के बाद …राज्य सभा में पास होने के बाद ही तीन-तलाक बिल कानून का जामा ओढ़ पायेगा।

( ये लेख़क के निजि विचार हैं )

 

 

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