जानिए ! मैत्री एैडवेंंचर क्लब – मैत्री साइकिल सीज़न-2 के सफल आयोजन की इनसाइड स्टोरी!

Maitri cycling Race season 2

परिस्थितियां चाहें कैसी भी हों, लेकिन जो लक्ष्य पूरा नहीं कर पाता, वो खिलाड़ी नहीं होता। और जो विषम परिस्थितियों में भी अडिग रहे , उसका हर कदम सफलता की ऊंचाईयों को छूता है। इससे पहले कि हम आपका तार्रूफ़ उस शख्स से करवाएं जिसने जिंदगी की विषम परिस्थिति में भी अपना धैर्य नहीं खोया और अपने साथियों के साथ मिलकर मैत्री साइकिल सीज़न-2 का न सिर्फ सफल आयोजन किया बल्कि हर उम्र के शक्स को एक संदेश भी दिया। कि शो-मस्ट-गो-ऑन । क्योंकि ये है मैत्री एैडवेंंचर क्लब – मैत्री साइकिल सीज़न-2 के सफल आयोजन की इनसाइड स्टोरी!

ऊपर तस्वीर में दिखाई पड़ने वाले इन शख्स का नाम है सुधीर बडोनी। जैसा नाम वैसी ही शख्सियत। सुधीर का अर्थ होता है दृंढ, बहादुर, निर्धारित। और अपने नाम को सार्थक करते हुए सुधीर ने विषम परिस्थियों में भी अपनी दृढ़ता नहीं खोई, बहादुरी से काम लिया और निर्धारित वक्त पर अपने मिशन यानि मैत्री साइकिल सीज़न-2 को सफल बनाकर साबित कर दिया, कि जहां चांह है वहां राह है। और इस सब में सुधीर की दृढ़ता को बनाए रखने में मैत्री एडवेंचर क्लब के आयोजक साथी उमेंश चंद, जगदीश बहुगुणा, सुमित ठाकुर और संदीप डोबरियाल ने अहम योगदान दिया। सुधीर खुद भी साइकिलिस्ट हैं और इन्हीं आयोजकों में से एक हैं।

दरअसल यहां सुधीर बडोनी का ज़िक्र इसलिए कर रहा हूं, कि अगर टीम का एक खिलाड़ी भी, कभी चोटिल हो जाए तो उसका असर पूरी टीम को झेलना पड़ता है। लेकिन सुधीर ने चोटिल होते हुए भी विषम परिस्थिति में साहस का परिचय दिया। क्योंकि शो-मस्ट-गो-ऑन…

सुधीर बडोनी की ता-उम्र रह रहकर याद ने वाली उस ह्रदय-विदारक चोट का ज़िक्र करें उससे पहले हम आपको फ्लैश-वैक में लिए चलते हैं। सुधीर समेंत ऊपर दिये गये (नाम) उनके सभी साथी मैत्री एडवेंचर क्लब की ओर से मैत्री साइकिल रेस सीज़न-2 की तैयारियों में ज़ोर-शोर से जुटे हुए थे। सभी तैय्यारियां चरम पर थीं। साइकिलिंग जैसे खेल को बढ़ावा देने के मकसद से इस खेल का आयोजन बड़े स्तर पर किया जा रहा था। 5 मई के रोज़ साइकिल रेस का आयोजन तय किया गया। मिशन था, उत्तराखंड में साइकिलिंग के प्रति लोगों में रुचि पैदा करना। खुद को फिट रखना और अपने राज्य को प्रदूषण मुक्त रखना।  

सब कुछ वक्त और प्लान के मुताबिक चल रहा था।  5 मई की सुबह  देहरादून के परेड ग्राउंड में 15-18, 19-35, 36-50 और 50+ उम्र के करीब 80  साइकिल सवार मैत्री साइकिल रेस सीज़न-2 में हिस्सा लेने के लिए उपस्थित और उत्तसाहित थे। लेकिन इस पूरे आयोजन में अपने साथियों के साथ इस रेस को सफल बनाने की हर प्लानिंग को पुख्ता करने वाला एक चेहरा यानि सुधीर बडोनी खुद कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे। खैर उनके बिना रेस शुरू हुई। क्योंकि मकसद था शो-मस्ट-गो-ऑन…

परेड ग्राउंड से शुरू होकर देहरादून के तमाम गांवों से गुज़रती हुई इस रेस का मकसद शहरी और ग्रामीण लोगों को आपस में जोड़ने के साथ साथ, ग्राणीण उत्पादों को शहर तक पहुंचाना भी था। ताकि गांव के लोगों को भी रोज़गार मिले। कहते हैं कि जब आप कोई काम नेकी के लिए करते हैं, तो पूरी कायनात मिलकर उस काम को सफल बनाने में जुट जाती है। क्योंकि शो-मस्ट-गो-ऑन…   

आयोजकों में से एक सुधीर बडोनी के दर्द का ज़िक्र करें उससे पहले आपको ये जानकर खुशी होगी कि सुधीर और सभी साथियों ने रेस के लिए जो मेहनत की थी, वो सफल रही। मैत्री साइकिल रेस सीज़न-2 सफलता पूर्वक समाप्त हुई। 15 से 18 आयु वर्ग में महिलाओं की कैटेगरी में अंजलि भंडारी ने पहला स्थान प्राप्त किया।

जबकि पुरुष वर्ग में सिद्धेश प्रवेश शर्मा पहले नंबर पर रहे। 19 से 35 आयु वर्ग में शिवम ने बाजी मारी। 36 से 50 साल के ग्रुप में वंदना और अशोक लिंबु ने प्रथम स्थान हासिल किया। जबकि 50+ कैटेगरी में अपना दमखम दिखाकर सबके प्रेरणा स्रोत बने सोहन रावत। क्योंकि शो-मस्ट-गो-ऑन…

मैत्री साइकिल रेस सीज़न-2 की सबसे अहम बात ये रही कि इस रेस में हिस्सा लेने वाला हर खिलाड़ी विजेता बना। आयोजकों ने खेल और खिलाडियों के प्रोत्सान के तौर पर मैडल और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। साथ ही 10 लकी ड्रॉ भी निकाले गये। विशेष साइकिलिस्ट तो 3 हज़ार रुपए का पुरस्कार भट्ट ऑप्टिकल के सौजन्य से दिया गया। सुधीर बडोनी अपने साथी उमेश चंद, जगदीश बहुगुणा, सुमित ठाकुर और संदीप डोबरियाल के साथ मिलकर पिछले 2 सालों से साइकिलिंग जैसे खेल को बढ़ावा देने में लगे है। इस खेल को बढ़ावा देने के लिए मैत्री एडवेंचर क्लब का हाथ थामा  बाइक शॉप देहरादून, हिमगिरी होटल मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट और रुद्राक्ष हैंडीक्राफ्ट ने। क्योंकि शो मस्ट-गो-ऑन…

दरअसल अगर सही मायनों में देखा जाए तो इस पूरी रेस के असल विजेता बने सुधीर बडोनी। वो शख्स जिन्होंने इस रेस के आयोजन के ठीक पहले अपने बड़े भाई को खो दिया। अचानक हुए ह्दयघात ने इनके बड़े भाई की जिंदगी ले ली। फिर भी सुधीर ने ऐसे वक्त में भी धैर्य नहीं खोया। विषम परिस्थियों में भी जि़ंदगी की रेस को गति देते हुए निर्णय लिया कि रेस को रोका नहीं जायेगा। और इनके साथियों ने ऐसे वक्त में इन्हें संबल दिया। और बता दिया कि परिस्थिति चाहें कैसी भी हों…शो-मस्ट-गो-ऑन  !

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