कालाढूंगी #HaldwaniLive #BolHaldwaniBol जंगलों पर इंसानी हुकूमत ने जंगली-जानवरों का जीना दुश्वार कर दिया है। जंगलों में अवैध कटान और कब्ज़े के चलते अब जंगली-जानवर बेहद असुरक्षित हो चुके हैं…और यही वजह है कि भोजन की तलाश में अक्सर जंगली-जानवर आवादी वाले इलाकों का रूख करने लग गये हैं। नैनीताल के कालाढूंगी इलाके में भी कुछ ऐसा ही वाक्या देखने में आया।

वाक्या कालाढूंगी के कमोला गांव के आर्मी एरिये का है यहां जंगली जानवरों से सुरक्षा के मद्देनज़र तारबाड़ लगाई गई है। ताकि जंगली जानवर रिहायशी इलाके में घुसकर किसी को जान-माल का नुकसान न पहुंचा सकें। गुरुवार सुबह थिम्मैया बाग इलाके में लगी इसी तारर-बाड़ में एक मादा गुलदार आ फंसी। दरअसल तारबाड़ में फंसी मादा गुलदार रिहाययशी इलाके में घुसना चाहतती थी, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से बनाये गये इंसानी चक्रव्यूह में फंस गई। मादा गुलदार के तारबाड़ में फंसने की खबर लगने पर वन विभाग की टीम भी मौके पर जा पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद मादा गुलदार को पिंजड़े में कैद कर लिया।

पिंजड़े में मादा गुलदार को कैद करने के लिए वन विभाग की टीम के जाड़े में ही पसीने छूट गये। खूबसूरत मादा गुलदार को तारबाड़ से निकालकर पिंजड़े में कैद करने की कवायद पर वन विभाग टीम को करीब 4 घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा। तब कहीं जा कर उसे पिंजड़े में कैद किया जा सका। पिंजड़े में कैद करने के बाद गुलदार को चूनाखान-वन क्षेत्र ले जाया गया। वन कर्मियों के मुताबिक पिंजड़े में कैद हुई मादा गुलदार की उम्र करीब 3 साल आंकी गई है।

वन कर्मियों की माने तो 3 साल की ये मादा गुलदार जंगल छोड़कर आवादी वाले इलाके में अपना शिकार खेलने के मकसद से घुसी थी। जो इंसान के साथ साथ पालतू जानवरों के लिए भी ख़तरनाक साबित हो सकता था…मादा गुलदार को पकड़ने के बाद वन विभाग राहत महसूस कर रहा है, क्योंकि अगर ये मादा गुलदार गलती से भी इसानी इलाके में जा घुसी होती तो इसके नरभक्षी होने का भी ख़तरा बन सकता था। जो इंसानी जिंदगी के लिए सबसे ज़्यादा ख़तरनाक साबित हो सकता था।

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