हल्द्वानी के “इंदिरानगर में स्कूल निर्माण” के लिए “भीख़ मांगने को मजबूर” अभिभावक

हल्द्वानी #BolHaldwaniBol 17 साल बाद भी न तो अपने राज्य की दशा सुधरी और न ही दिशा…सरकारें आईं और गई…शहर ने एक नहीं दो-दो कैबिनेट मंत्री दिये…पर फिर भी कुछ नहीं बदला…आज भी वर्तमान में एक कैबिनेट मंत्री अपने हल्द्वानी से है, लेकिन हालात ये हैं कि अधिकारी उनकी सुनते नहीं…कांग्रेस में तो तब भी हुकूमत चलती थी…लेकिन बीजेपी में हालत बद से बद्तर है उनकी…अरे भई अपने यशपाल आर्या जी की बात कर रहे हैं…समझे कि नहीं…
बहरहाल मुद्दे की बात पर आते हैं…दरअसल अपने हल्द्वानी वालों को जब परेशानी कोड़ से ख़ाज बन कर चुभने लगती है, तब सबको आवाज़ उठाने की याद आती है…कुछ ऐसा ही वाक्या अपने शहर में शनिवार के रोज़ देखने को मिला…वाक्या शिक्षा महकमें से जुड़ा है…अपने इंदिरा नगर के मुस्लिम बाहुल्य इलाके में बच्चों के लिए जो प्राथमिक विद्धालय है उसकी हालत बद से बद्तर है…पिछले 3 साल से इस प्राथमिक स्कूल के पुनर्निर्माण के लिए इलाके के लोगों ने जमकर धरना प्रर्दशन और आंदोलन के किये…पर सरकार के साथ साथ शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सिर पर जूं तक नहीं रेंगी…3 साल का मतलब बोले तो कांग्रेस के कार्यकाल में भी अपने इंदिरानगर के प्राथमिक स्कूल के पुर्नर्निमाण के लिए लोगों ने आवाज़ बुलंद की… वो भी तब जब अपने नगर से 2 कैबिनेट मंत्री थे…पहले तो अपने यशपाल आर्या जी और दूसरी अपनी मैडम जी…अरे इंदिरा ह्रदयेश जी…दोनों कद्दावर नेता…लेकिन एक प्राथमिक स्कूल के लिए ये दोनों ही कुछ न कर सके…जैसा कि पब्लिक कहती है…चलिए जी आगे बढ़ें अब सबकी मन पसंद सरकार आ गई…तो सोंचा चलो इस बात तो इंदिरा नगर के इस प्राथमिक विद्यालय के दिन बहुर जाएंगे…
लेकिन…अरे ये क्या हुआ…इस सरकार ने तो अभिभावकों के हाथों में भीख़ का कटोरा ही थमवा दिया…सच में…बहुत नाइंसाफी है...शनिवार को सिस्टम और सरकार से थके हारे परेशान अभिभावक भीख़ मांगने को आख़िरकार निकल ही पड़े…अब आप खुद ही सोंचिए कि इंदिरानगर का जो खस्ता हाल प्राथमिक स्कूल है उसके 370 से भी ज्यादा बच्चे बनभूलपुरा के जीआईसी के सभागार में पढ़ रहे हैं वो भी इस कड़-कड़ाती ठंड में… इंदिरानगर के स्कूल के हालात सुधारने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी तमाम बार दरख्वास्त की गई…लेकिन अधिकारी तो अधिकारी ठहरे…बस रो दिये…बजट का रोना
लेकिन इस बार अभिभावक सरकार को आइना दिखाने के मकसद से सड़कों पर उतरे…हाथों में भीख मांगने का कटोरा लेकर…ताककि स भीख से इकट्टठा धनराशि से इंदिरानगर के उस खस्ता हाल स्कूल को सही करवाकर अपने बच्चों का भविष्य संवार सकें…
मतलब आप इनके हाथों में नारे लगीं इन तख्तियों को देखिए…शिक्षा का अधिकार तक मांगना पड़ रहा है…स्कूल के भवन निर्माण के लिए भीख दें…सच में बेहद शर्मनाक है वर्तमान सरकार के लिए…
अरे हां याद आया…वो अपनी मैडम अब सरकार में तो नहीं हैं लेकिन विधायक तो हैं न भईया…फंड भी आता ही है…इन्होंने की मदद नहीं की…सच में हद हो गई…अरे वो अपने कांग्रेस वाले अरे नहीं बीजेपी वाले…अब भी कैबिनेट मंत्री ही तो हैं न…अच्छा उन्होंने ने भी कोई मदद नहीं की…उफ्फ…सच में बहुत नाइंसाफी है…
ओह याद आया अपने शिक्षामंत्री…अरे भाई राज्य के पूरे शिक्षा-तंत्र को बदलने में जुटे हैं…गदर मचा दिया है उन्होंने पूरे शिक्षा विभाग को अप-टू-डेट करने की ख़ातिर…अरे दाज्यू पांडे जी …अरे अरविंद पांडे …हां-हां वो ही…क्या… नहीं गये उनके पास…उन तक अपनी बात नहीं पहुंचाई…ओह…तभी तो…वरना तो अब तक एक ही आदेश में स्कूल का काया-कल्प हो चुका होता…ये कटोरा लेकर भीख़ मांगने की नौबत थोड़े ही आती…बच्चों के लिए एक दम दरिया दिल शख्स हैं…पांडे जी
चलिए कोई नहीं… #HaldwaniLive आपकी आवाज़… पांडे जी तक आपकी ये फरियाद पहुंचाकर ही रहेगा…और एक्शन भी होगा…सच में अपने मासूम ठंडी में दर बदर भटकें ये कतई मंजूर नहीं…लेकिन सच में शनिवार को जो भी हुआ वो वाकई बेहद शर्मनार तो है ही…सरकार के लिए…
पब्लिक का कोई भी काम रुकेगा… #HaldwaniLiveआपकीआवाज़ … ऐसे ही आग बरसेगा…

Share, Likes & Subscribe