January 20, 2021

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हल्द्वानी को मिला देश का पहला पोलीनेटर पार्क !

उत्तराखंड-हल्द्वानी- देश के पहले पोलीनेटर पार्क ने उत्तराखंड में आकार ले लिया है. हल्द्वानी में चार एकड़ में फैले इस पार्क को वन अनुसंधान केन्द्र ने बनवाया है. इसमें मधुमक्खियों से लेकर पक्षियों तक की करीब 40 प्रजातियों को संरक्षित किया गया है. जो की पोलीनेटर में सहायक होती है. वन अनुसंधान केन्द्र के मुताबिक, देश में जागरुकता के अभाव के कारण अभी तक कहीं भी पोलीनेटर पार्क या बगीचे नहीं बनवाए गए हैं. जबकि अमेरिका में जगह-जगह पोलीनेटर पार्क और गार्डन बनवाए गए हैं. संसद न इसे लेकर बाकायदा कानून भी बनाए हैं.

हल्द्वानी में स्थित इस पोलीनेटर पार्क को तितलियों, मधुमक्खियों, कीड़े, पौधे और पक्षियों के अनुकूल बनाया है. जो कि वानस्पतिक संतुलन को बनाए रखने में सहायक हैं. इसके लिए पार्क में जगह-जगह जल कुंड बनाए गए हैं. जामुन, नीम और सेमल प्रजाति के पेड़ लगाए गए हैं. जिसकी जानकारी डिस्प्ले बोर्ड और दीवारों पर बनी कलाकृतियों के माध्यम से दी गई है.

हल्दवानी को मिला देश का पहला पोलीनेटर पार्क
हल्दवानी को मिला देश का पहला पोलीनेटर पार्क

वन अनुसंधान केन्द्र के निदेशक, संजीव चतुर्वेदी ने बताया, कि पोलीनेटर पार्क बनकर तैयार हो गया है. जिसका मंगलवार को उद्घाटन किया जाएगा. पार्क को तैयार करने में कई तितली विशेषज्ञों की मद्द ली गई है. ये देश का पहला पार्क है, जिसमें 40 तरह के पोलीनेटर्स हैं. वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में यूरोपियन प्रजाति की मधुमक्खियों का पालन बढ़ता चला जा रहा है. जिस वजह से देसी प्रजातियों की मधुमक्खियों पर संकट है. जिसके चलते अधिकारियों को इसे ढूंढने में कड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. जिसके बाद आखिर में इसे कुमाऊं की गरुड़ घाटी से प्राप्त कर लिया गया.

करीब 40 प्रजातियों को किया गया है संरक्षित
करीब 40 प्रजातियों को किया गया है संरक्षित

वन उनुसंधान केन्द्र के अधिकारियों के मुताबिक, लगभग 95 प्रतिशत फूल वाले पौधे को अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए तितली, मधुमक्खी आदि के पोलीनेटर की जरुरत होती है. इस तरह पोलीनेटर न हों और मिट्टी पोषक तत्वों से भरपूर हो, तो भी 1.08 लाख किस्म के पौधे अपना अस्तित्व नहीं बचा पाएंगे.

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