हल्द्वानी #HaldwaniLive #BolHaldwaniBol  में बात आज तीन जालसाजों की जिन्होंने हल्द्वानी के कई लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल लिया। दरअसल हल्द्वानी पुलिस में ये शिकायत किसी और ने नहीं बल्कि, खुद उस बैंक के प्रबंधक ने की है जिसके जालसाज कर्मचारियों ने इस वारदात को अंजाम दिया।

जालसाजी का ये मामला शुरू होता है सुभाषनगर से…सुभाषनगर में एक निजि फाइनेंस कंपनी उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक है जिसके प्रबंधक हैं पवन कुमार। पवन ने कोतवाली में अपनी ही फाइनेंस कंपनी के तीन कर्मचारियों के खिलाफ, ग्राहकों से धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज करवाई। जिसको संज्ञान में लेते हुए फौरन पुलिस ने आरोपियों के ख़िलाफ़ IPC की धारा 420 और 406 के तहत मामला दर्ज कर लिया ।

दरअसल इस धोखाधड़ी की कहानी शुरू होती है भोरेसे से … सुभाष नगर में निजि उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक नाम की इस कंपनी पर लोगों ने भरोसा किया… भरोसा दूसरे बैंकों से ज्यादा ब्याज का…कर्ज़ आसानी से मिलने का और भी दूसरे तमाम फायदों का। शुरूआत में इस कंपनी से जुड़े कर्मचारियों ने लोगों का भरोसा जीता…निजि बैंक के कर्मचारी हर रोज़ शहर में बनाए अपने ग्रहकों से  से पैसा लेकर कलेक्शन करते और निजि बैंक को हिसाब दे देते…शुरूवात में तो सबकुछ ठीक-ठाक चलता रहा। लेकिन इस निजि बैंक के कर्मचारियों ने जैसे ही ग्राहकों के भरोसे पर अपनी पकड़ मजबूत की…बस यहीं से नींव पड़ी जालसाजी…और धोखे की।

Utarkash Small Finance Bank  नाम की निजि फाइनेंस कंपनी के प्रबंधक पवन कुमार के मुताबिक आरोपी कर्मचारी हैं …सचिन गिरी, मदकोटा, धर्मपुर, भूरारानी-रुद्रपुर का रहने वाला है, जबकि संजय कुमार खटीमा के मझौला का निवासी है…और तीसरा आरोपी अजय चौहान है जो हरिद्वार के कूड़ी भवानपुर – लक्सर का रहने वाला है। आरोप है कि इस तीनों ने एक योजना के तहत हर रोज ग्राहकों से इक्टठा होने वाला पैसा….अपनी जेब भें भरना शुरू कर दिया…आरोप है कि ग्राहकों से धोखाधड़ी कर इन तीनों ने करीब 6,76,346 रुपए डकार लिये। ममामला तब खुला जब ग्राहकों ने इस निजि बैंक से अपनी जमा राशी के बारे में पूछना शुरू किया…तो निजि फाइनेंस कंपनी के प्रबंधक से अपने खाते की डिटेल जानकर इन सभी के पैरों तले से ज़मीन ही खिसक गई। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी…बहरहाल पुलिस ने मामले की तहकीकात शुरू कर दी है…

                                             आप रहें सावधान

दरअसल इस तरह की जालसाजी…धोखाधड़ी…ठगी…के लिए कहीं न कहीं हम खुद ही ज़िम्मेदार हैं..पढ़े-लिखे होने के बावजूद भी ज्यादा कमाई के चक्कर में तमाम लोग कई प्राइवेट कंपनियों में पैसा लगा बैठते हैं और फिर अंजाम सब जानते हैं…या तो लोग इस तरह ठग लिए जाते हैं या फिर कंपनी ही दुनकान बंद करके भाग जाती है। सलाह है कि आप अपनी मेहनत की कमाई को सिर्फ सरकारी या सुरक्षित बेंकों में ही जमा कराएं….ताकि आपकी कमाई महफूज़ रह सके और चैन की नींद सो सकें।

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