बद्-मिजाज़ फौजी, बाल-बाल बचे “मुख्यमंत्री”..!

CM Trivendta singh Rawat Helicopter
बाल-बाल बचे “सरकार” !

उत्तराखंड #Haldwanilive बाल बाल बच गये “सरकार”, जी हां अपने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत रविवार को एक बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गये। सेना का सब एरिया कमांडर बना ख़लनायक । 

दरअसल रविवार के रोज मुख्यमंत्री यानी “सरकार” को Uttarkashi ज़िले के सांवणी गांव में अग्निकांड  पीड़ित परिवारों से मिलने जाना था। साथ ही पीडित परिवारों को सहायता राशि भी बांटनी थी। इस मिशन पर निकलने के लिए अपने “सरकार” को Dehradun Cantt में बने जीटीसी हैलीपैड से उड़न-खटोले पर बैठकर उड़ान भरनी थी और उत्तरकाशी के जखोल में बने अस्थाई हैलीपैड पर उतरना था।

लेकिन सेना के जवानों ने उत्तराखंड पुलिस और मुख्यमंत्री को बता दिया, कि उनकी भी एक सीमा है।

दरअसल रविवार के रोज जब मुख्यमंत्री रावत जीटीसी हैलीपैड पर पहुंचने के लिए अपने पूरे काफिले के साथ निकले, तो उन्हें और उनकी सुरक्षा में चल रहे उत्तराखंड पुलिस के अधिकारियों को भी अंदाज़ा नहीं था कि सेना के जवान बीच सड़क पर उनकी फजीहत कर देंगे।

“सरकार” के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की मानें तो रविवार के रोज़ दोपहर करीब 12.15 पर “सरकार” की फ्लीट  GTC  हैलीपैड पहुंची ही थी,कि तभी अचानक GOC SUB AREA Dehradun यानि सब एरिया कमांडर ने अपनी निजी होंडा सिटी गाड़ी ( HR 26 BF-8010 ) फ्लीट के आगे लगाकर रोक दी। इस पर कैंट के थानाध्यक्ष और सीओ सिटी ने फौजी अधिकारी को बताया कि मुख्यमंत्री की फ्लीट आ रही है, और वो अपनी गाड़ी साइड में लगा लें। बस फिर क्या था, फौजी अधिकारी भड़क गया, और पुलिस वालों से बद्तमीजि के साथ साथ Co City  समेत थानेदार को ही धमका डाला। फौजी अधिकारी पर आरोप है कि खुलेआम धमकी देते हुए उसने कहा कि जिस जगह से सीएम की फ्लीट गुज़र रही है, वो उसका एरिया है। मतलब कि वो फौजी एरिया से गुज़र रहे हैं। और अपने “सरकार“ को जाके बता दो कि यहां उस अधिकारी यानी फौजियों की मर्जी से ही वो आ-जा सकते हैं।

इस पूरे वाक्ये में फौजी अधिकारी ने Uttarakhand Police के साथ वो कर दिखाया, जो पुलिस अधिकारियों ने  सपने में भी नहीं सोचा होगा। फौजी अधिकारी ने सारे पलिस वालों की गाड़ियां रुकवा दीं, और सबको गाड़ियों से बाहर करवा दिया। फौजी ने CM Security में लगे अधिकारियों को दिन में ही तारे दिखा दिये। इस पूरे वाक्ये के दौरान “सरकार” की गाड़ी काफी देर तक सड़क पर पीछे खड़ी रही। काफी जद्दोजहद के बाद फौजी अधिकारी ने सीएम की गाड़ी को वहां से हैलीपैड पर पहुंचने के लिए जगह  दी। जिसके बाद “सरकार” उड़न-खटोले पर बैठकर उत्तरकाशी के लिए उड़ गये।

Dehradun GTC Helipad
हेलीपैड पर फौजियों ने खड़े किये “ड्रम”

जिसके बाद पुलिस वालों ने कुछ राहत की सांस ली ही थी, कि फौजियों ने एक और बड़ा ड्रामा कर दिया। उत्तरकाशी यात्रा के बाद जब उड़न-खटेले से “सरकार” वापस देहरादून लौटे, तो फौजियों की एक और बद्तमीजी कहें या फिर सिरफिरा-पन देखने को मिली।

लेकिन इस बार फौजियों पर जो हरकत करने का आरेप लगा, वो वाकई बेहद संगीन था। क्योंकि जिस वक्त “सरकार” का उड़न-खटोला हेलीपैड पर उतर रहा था, आरोप है कि ठीक उसी वक्त सेना के कुछ सिरफिरे जवानों ने हेलीपैड पर ही दो ड्रम लाकर रख दिये। क्योंकि जब पायलट हैलीकॉप्टर लैडिंक के लिए चक्कर काट रहा था तो उस वक्त हेलीपैड बिल्कुल साफ था और उस पर ड्रम भी नहीं थे। लेकिन अचानक फौजियों की सिरफिरी हकरत ने पायलट को भी गच्चा दे दिया। पायलट भी हेलीपैड पर फौजियों द्वारा रखे दोनों ड्रम को देख नहीं पाया। लेकिन जैसे ही उड़न-खटोले को पायलट ने नीचे लिया, तो उसके हाथ पैर फूल गये। क्योंकि उसने हेलीपैड पर रखे दोनों ड्रम देख लिये थे। और एन-मौके पर सही फैसला लेते हुए हेलीकॉप्टर को दूसरी दिशा में मोडकर दूसरी जगह लैंड करवाया।

इस पूरे घटनाक्रम में अगर पायलट निर्णय लेने में ज़रा सी भी देरी करता तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। और मुख्यमंत्री की जान को भी ख़तरा हो सकता था।

 

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