नैनीताल #Haldwanilive उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अवैध तरीके से खनन करने और स्टोन क्रेशर लगाने के एक मामले में सुनवाई करते हुए केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड और राज्य सरकार से 4 हफ्ते में जवाब तलब करने के आदेस दिये हैं।

दरअसल हरिद्वार निवासी डॉ. विजय वर्मा ने के जनहित याचिका दायर की थी। डॉ वर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि गंगा नदी में खनन कार्य और स्टोन क्रेशरों को अवैध तरीके से लगाया जा रहा है…जिसमें पूर्व केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड ने ज़िला अधिकारी हरिद्वार और एसएसपी हरिद्रवार को 16 दिसंबर 2016 को आदेश दिया था कि वो स मामले में एसआईटी का गठन करें। जिसके तहत इस मामले को उत्तराखंड हार्ई कोर्ट ने गंबीरता से लिया। बुद्धवार को हार्ई कोर्ट ने डॉ वर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई की। इस मामले को खुद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के.एम.जोसफ और न्यायाधीश वीके बिष्ट की खंडपीठ ने सुना। सुनवाई के फौरन बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और प्रदूषण बोर्ड से चार हफ्ते में जवाब देने का आदेश दे दिया।

गंगा में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को देखते हुए  गंगा नदी से जुड़े हर मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है। आपको बता दें कि पहले ही गंगा नदी को किसी इसांन के समतुल्य होने का दर्जा न्यायलय की तरफ से मिल चुका है। यानि जिस तरह से न्यायलय किसी इंसान के मामले में दोनों पक्षों की सुनवाई करता है ठीक वैसे ही गंगा नदी में प्रदूषण के मामले पर भी कोर्ट लगातार गंभीरता से मामलों की सुनवी कर रहे हैं। केंद्र सरकार गंगा सफाई अभियान पर करोड़ों रुपए खर्च चुकी है बावजूद इसके गंगा नदी से प्रदूषण खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। जिसे देखते हुए खुद न्यायलय को ही सख्त रुख़ अख्तियार करना पड़ा। और हरिद्वार निवासी डॉ वर्मा का मामला भी गंगा नदी से खननऔर बेहिसाब लगाये जा रहे स्टोन क्रेशरों से जुड़ा है। जिस हाईकोर्ट ने संख्त रुख दिखाया है।

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